दमिश्क | सीरिया की राजधानी दमिश्क के बाहरी इलाके द्वेइला में रविवार को एक भीषण आत्मघाती हमला हुआ, जिसने देश की सुरक्षा व्यवस्था को हिला कर रख दिया। भीड़भाड़ वाले मार एलियास चर्च में प्रार्थना के दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया, जिससे कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि 63 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय मीडिया के अनुसार मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में हुआ हमला
यह हमला उस इलाके में हुआ जिसे अब तक दमिश्क का सबसे सुरक्षित और संरक्षित क्षेत्र माना जाता था। सीरियाई सरकारी मीडिया ने इसे “कायरतापूर्ण आतंकवादी हमला” करार दिया है। हालांकि अब तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन घटना की भयावहता ने राजधानी में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
सीरियाई सूचना मंत्री की प्रतिक्रिया
सीरिया के सूचना मंत्री डॉ. हमजा मुस्तफा ने इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा,
“यह हमला हमारे नागरिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द पर सीधा हमला है। सरकार आतंकवादी संगठनों और समाज विरोधी तत्वों से सख्ती से निपटने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।”
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा झटका
एक उच्चपदस्थ सुरक्षा सूत्र के अनुसार इस हमले में दो हमलावर शामिल थे, जिनमें से एक ने चर्च के अंदर खुद को विस्फोटक से उड़ा लिया। घटना ऐसे समय पर हुई है जब हाल ही में राष्ट्रपति बने अहमद अल-शरा, जो पूर्ववर्ती शासन के खिलाफ मुखर रहे हैं, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर चुके हैं।
सीरिया में फिर से चरमपंथी खतरे की दस्तक?
इस हमले ने न केवल राजधानी की सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि देश में फिर से सक्रिय हो रहे कट्टरपंथी स्लीपर सेल्स को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। सीरिया, जो वर्षों से गृहयुद्ध और चरमपंथ का सामना कर रहा है, अब धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर वैश्विक बहस के केंद्र में है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर
दमिश्क में हुए इस आत्मघाती हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।