Summer express, वॉशिंगटन |मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे ईरान के चार ड्रोन को मार गिराया और इसके बाद ईरान के कई तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में लागू नाजुक संघर्षविराम और कूटनीतिक प्रयासों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ये ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात और सैन्य गतिविधियों के लिए तत्काल खतरा पैदा कर रहे थे। इसी वजह से अमेरिकी बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित कई निगरानी एवं रडार केंद्रों को निशाना बनाया। इनमें जलडमरूमध्य के समीप एक द्वीप पर स्थित रडार सुविधा भी शामिल बताई गई है।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर भी असर डाल रहा है। हालिया घटनाओं के बाद कच्चे तेल और ऊर्जा कीमतों में तेजी देखी गई है।
इस सप्ताह ईरानी ड्रोन हमलों से कुवैत के मुख्य हवाई अड्डे को भी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई थीं, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की सूचना मिली थी। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन अब भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और किसी न किसी रूप में मौजूदा संकट का समाधान निकाला जाएगा।
उधर, अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा और तेल कारोबार पर दबाव बढ़ाते हुए कई कंपनियों, व्यक्तियों और तेल टैंकरों पर नए प्रतिबंध लगाने की भी घोषणा की है। साथ ही अमेरिकी नौसेना ने हिंद महासागर में ईरान से जुड़े एक प्रतिबंधित तेल टैंकर को अपने नियंत्रण में लेने का दावा किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।