मुंबई | देश के कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। अब गैस की कीमतें इस बात पर निर्भर नहीं करेंगी कि उपभोक्ता गैस सोर्स के कितने पास या दूर हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (PNGRB) ने यूनिफाइड टैरिफ सिस्टम को मंजूरी दे दी है, जिससे देश के कई हिस्सों में गैस की दरें घट सकती हैं।
क्या बदलेगा नए ढांचे में?
अब तक देश में तीन अलग-अलग टैरिफ जोन तय किए गए थे और उपभोक्ताओं को उसी के मुताबिक शुल्क देना पड़ता था। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गैस महंगी मिलती थी। नए फ्रेमवर्क के तहत अब केवल दो जोन रहेंगे, जिससे उपभोक्ताओं पर दूरी के आधार पर लगने वाला अतिरिक्त भार कम हो जाएगा।
कैसे मिलेगा सीधा लाभ?
एक जोन के भीतर सभी उपभोक्ताओं को अब एक जैसी दर पर गैस मिलेगी, चाहे वे ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के कितने भी करीब या दूर क्यों न हों। इससे विशेष रूप से उन शहरों और कस्बों में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी जहां अब तक गैस की कीमतें अधिक थीं।
बदलाव कब तक लागू होगा?
सूत्रों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में इस प्रस्ताव को लेकर आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। इसके बाद यह व्यवस्था जल्द लागू होने की संभावना है। इससे लाखों परिवारों और CNG वाहनों पर निर्भर चालकों को सीधा फायदा पहुंचेगा।
सरकार की भविष्य की योजना
सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक 12 करोड़ से अधिक घरों में PNG कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए और 2025 तक देशभर में 17,500 से अधिक CNG स्टेशन स्थापित किए जाएं। यह कदम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
गैस का उपयोग: पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद
CNG जहां पेट्रोल-डीजल के मुकाबले सस्ता विकल्प है, वहीं यह पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचाता है। PNG की आपूर्ति पाइपलाइन के ज़रिए सीधे घरों तक होती है, जिससे सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती और रसोई में लगातार गैस की उपलब्धता बनी रहती है। यह न केवल सुरक्षित है, बल्कि अधिक सुविधाजनक भी साबित होता है।
इस नीति परिवर्तन को ऊर्जा क्षेत्र में एक अहम सुधार के तौर पर देखा जा रहा है, जो उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।