घाना | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को घाना की राजधानी अकरा में राष्ट्रपति जॉन महामा के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता के बाद कहा कि भारत और घाना के बीच द्विपक्षीय रिश्तों ने अब ‘व्यापक साझेदारी’ का रूप ले लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सिर्फ एक सहयोगी नहीं बल्कि घाना की प्रगति में सक्रिय भागीदार है।
व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और घाना अगले पांच वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि भारत की कंपनियां अब तक करीब 900 परियोजनाओं में लगभग दो अरब डॉलर का निवेश घाना में कर चुकी हैं।
तीन दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा
पीएम मोदी घाना की यात्रा पर पहुंचे तो राष्ट्रपति महामा ने पारंपरिक अंदाज़ में एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। यह पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा है।
चार अहम समझौते हुए
दोनों देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा, संस्कृति, खनिज खोज और रक्षा सहयोग से जुड़े चार प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। मोदी ने कहा कि भारत घाना के साथ यूपीआई जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम साझा करने को तैयार है और फिनटेक, स्वास्थ्य, खनन और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में गहरा सहयोग करेगा।
आतंकवाद और सुरक्षा पर साझा रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा, “हम इस बात पर सहमत हैं कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन है।“ उन्होंने घाना को आतंकवाद के खिलाफ सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, समुद्री सहयोग और सैन्य प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा।
‘यह युद्ध का युग नहीं’
पश्चिम एशिया और यूरोप में जारी संघर्षों पर चिंता जताते हुए मोदी ने कूटनीति और संवाद से समाधान निकालने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, “यह युद्ध का युग नहीं है, बल्कि यह समय समस्याओं को शांति से सुलझाने का है।”
‘ग्लोबल साउथ’ पर फोकस
पीएम मोदी ने घाना की ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ में भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि भारत और घाना जैसे देश वैश्विक दक्षिण के मुद्दों पर एक जैसी सोच रखते हैं। उन्होंने जी20 में अफ्रीकी संघ की स्थायी सदस्यता को भी भारत के लिए गौरव की बात बताया।
नई साझेदारी, नई संभावनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति महामा के साथ सार्थक बातचीत की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के कई क्षेत्रों की पहचान की। इनमें रक्षा, ऊर्जा, खनिज, डिजिटल तकनीक, कौशल विकास और हेल्थकेयर शामिल हैं।
यह दौरा न केवल भारत-घाना रिश्तों को एक नई दिशा देगा, बल्कि अफ्रीकी देशों के साथ भारत की रणनीतिक पहुंच को भी और सशक्त करेगा।