पटना | बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने महागठबंधन (RJD–कांग्रेस–लेफ्ट) का हिस्सा बनने की इच्छा जताई है। पार्टी की ओर से बिहार इकाई के अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को इस संबंध में एक औपचारिक पत्र लिखा है।
“सेकुलर वोटों का बिखराव रोकना चाहते हैं”
पत्र में अख्तरुल ईमान ने कहा कि AIMIM 2015 से बिहार में सक्रिय है और उसका मुख्य उद्देश्य धर्मनिरपेक्ष मतों के बंटवारे को रोकना है। उन्होंने लिखा: “जब सेकुलर वोटों का बिखराव होता है तो सांप्रदायिक ताकतों को लाभ मिलता है। इसलिए हम सभी दलों को मिलकर लड़ना चाहिए।”
गौरतलब है कि AIMIM पहले भी 2020 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले महागठबंधन में शामिल होने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन उन्हें जगह नहीं मिल पाई।
ओवैसी बोले– “अगर बीजेपी को रोकना है, तो प्रस्ताव स्वीकार करें”
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी महागठबंधन में शामिल होने की बात दोहराई। उन्होंने कहा,
“अगर बिहार में भाजपा को रोकना है तो हमारा प्रस्ताव स्वीकार किया जाए। हम INDIA गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार हैं, और यदि ऐसा नहीं हुआ तो AIMIM अकेले भी चुनाव लड़ेगी।”
सिमांचल पर फोकस, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं
AIMIM इस मौके पर सिमांचल और मुस्लिम-बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। अख्तरुल ईमान ने मीडिया से बताया कि उन्होंने RJD और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
RJD और कांग्रेस की ओर से क्या प्रतिक्रिया?
राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि गठबंधन में शामिल करने का फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। हालांकि उन्होंने AIMIM को “वोट काटने वाली पार्टी” बताते हुए आलोचना भी की।
कांग्रेस की ओर से तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में समर्थन देने पर आंतरिक चर्चा चल रही है, जिससे विपक्षी एकता को लेकर स्थिति साफ होने लगी है।
राजनीतिक समीकरणों पर संभावित असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर AIMIM को गठबंधन में शामिल किया गया तो यह सिमांचल और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में विपक्ष को मजबूती दे सकता है।
हालांकि कुछ नेताओं को यह भी आशंका है कि AIMIM का साथ लेने से अन्य वोटबैंक प्रभावित हो सकते हैं, खासकर यह देखते हुए कि 2020 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन ने राजद को नुकसान पहुंचाया था।
AIMIM की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि पार्टी अब बीजेपी की बी-टीम के आरोपों से ऊपर उठकर खुद को मजबूत सेकुलर विकल्प के तौर पर स्थापित करना चाहती है।