टेक्सास | गर्मियों की छुट्टियों में जहां कभी बच्चों की मुस्कानें गूंजती थीं, वही कैम्प मिस्टिक अब विनाश और शोक का प्रतीक बन गया है। ग्वाडालूपे नदी में अचानक आई बाढ़ ने महज 45 मिनट में 26 फीट तक जलस्तर बढ़ा दिया और पूरा कैंप जलमग्न हो गया।
लहरों में बह गया मासूम बचपन
इस भयावह आपदा में कैंप की कई इमारतें और केबिन बह गए। उस समय वहां लगभग 750 बच्चियां मौजूद थीं। अधिकारियों ने अब तक 43 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 27 बच्चियां अब भी लापता हैं। कई परिवार अपने बच्चों की पहचान तौलियों, चूड़ियों और कीचड़ में दबी तस्वीरों से कर रहे हैं।
पिता की उम्मीद, मलबे में तलाश
ऑस्टिन निवासी माइकल के लिए यह सप्ताह किसी दु:स्वप्न से कम नहीं रहा। शुक्रवार सुबह उन्हें वह फोन कॉल आया जिसे कोई भी मां-बाप नहीं सुनना चाहता – “आपकी बेटी लापता है।” जब वह कैंप पहुंचे तो कीचड़ में उन्हें बेटी की चूड़ी, तौलिया और पारिवारिक फोटो तो मिली, लेकिन बेटी का कोई सुराग नहीं।
पेड़ से लटकती मिली बच्ची, रेस्क्यू अभियान जारी
गवर्नर ग्रेग एबॉट ने बताया कि बड़े पैमाने पर बचाव कार्य चल रहा है। हेलिकॉप्टर, बोट और ड्रोन की मदद से हजारों बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। एक बच्ची को पेड़ से लटकते हुए देखा गया जिसे एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
तबाही के निशान
कैम्प मिस्टिक का डाइनिंग हॉल पूरी तरह से ढह गया। कैंपस के मैदान में मैपल सिरप की बोतलें, कुर्सियां और टेबलों के टुकड़े बिखरे पड़े हैं – ये सब इस बात की गवाही देते हैं कि जिंदगी कुछ ही मिनटों में कैसे तबाह हो सकती है।
सोशल मीडिया बनी उम्मीद की किरण
घबराए अभिभावक अब सोशल मीडिया पर अपनी बच्चियों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। कुछ को आखिरी लोकेशन याद है, कुछ ने व्हाट्सएप पर भेजे गए वीडियो को फिर से खंगाला है। राहत शिविरों में भीड़ है और हर चेहरे पर एक ही सवाल – “क्या मेरी बच्ची सुरक्षित है?”
“चमत्कार की उम्मीद है…”
बाढ़ को तीन दिन हो चुके हैं, लेकिन माइकल अब भी हर कोना खंगाल रहे हैं। “वो यहीं है… मुझे यकीन है… चमत्कार होगा,” वे बार-बार दोहराते हैं।
स्थानीय निवासी गेरार्डो मार्टिनेज की बात में गहराई थी – “हर सौ साल में एक बार ऐसी बाढ़ आती है… और अब वो समय आ चुका है।”