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डीसी ऊना का बड़ा बयान:बल्क ड्रग पार्क को लेकर सोशल मीडिया की अफवाहों पर न दें ध्यान

Una, Rakesh-हरोली विकास खंड के पोलियां क्षेत्र में निर्माणाधीन बल्क ड्रग पार्क परियोजना को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने मंगलवार को विशेष ‘मीडिया वॉकथ्रू’ का आयोजन किया। इस अवसर पर उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने स्पष्ट किया कि परियोजना का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ किया जा रहा है।

 विकास और पर्यावरण दोनों हमारी प्राथमिकता

डीसी ने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर परियोजना के बारे में भ्रामक जानकारियाँ फैला रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि यह परियोजना न केवल हिमाचल के औद्योगिक विकास की रीढ़ बनेगी, बल्कि यह राज्य को फार्मा क्षेत्र में वैश्विक पहचान भी दिलाएगी। उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना में राष्ट्रीय हरित अधिकरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा केंद्र और राज्य सरकार की सभी पर्यावरणीय दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि परियोजना स्थल पर भूजल संरक्षण, वनीकरण, वन्यजीव संरक्षण व प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस रणनीति तैयार की गई है। पोलियां में 15 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला जल भंडारण टैंक पहले ही बनकर तैयार है, जो प्रारंभिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है।

डीसी जतिन लाल ने बताया कि बल्क ड्रग पार्क मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की औद्योगिक विकासोन्मुख सोच का परिणाम है। 1405 एकड़ में 2000 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह परियोजना देश की तीन राष्ट्रीय बल्क ड्रग पार्क परियोजनाओं में शामिल है। भविष्य में इस पार्क में 10,000 करोड़ रुपये तक का निवेश और 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों की संभावना है।

उद्योग विभाग: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक अंशुल धीमान ने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) की घरेलू आपूर्ति को सुनिश्चित कर भारत को औषधि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली और जलापूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाएं तेज़ी से तैयार की जा रही हैं, जिनमें 85% जलापूर्ति कार्य पूर्ण हो चुका है। साथ ही, ई-वेस्ट, बायोमेडिकल वेस्ट सहित सभी प्रकार के कचरे के निपटान के लिए अत्याधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे।

वन विभाग का स्पष्टीकरण: परियोजना क्षेत्र वन भूमि नहीं

डीएफओ सुशील राणा ने बताया कि पोलियां क्षेत्र में लगभग 45,822 पेड़ हैं, जिनमें से अधिकांश छोटी और कम श्रेणी के हैं। यह क्षेत्र वन भूमि न होकर राजस्व श्रेणी की खुली वनस्पति क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि हर कटे पेड़ के बदले 10 नए पौधे लगाए जाएंगे और कुल परियोजना क्षेत्र का 33% ग्रीन बेल्ट के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा।

Chandrika

tsnchd@gmail.com

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