चंडीगढ़, 14 जुलाई
भाषा संस्कारों की पहली पहचान होती है, लेकिन हाल ही में ‘सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन’ द्वारा किए गए एक विशाल सामाजिक सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि देश के कई हिस्सों में मां, बहन और बेटी को संबोधित गालियों का चलन आम बात बन गया है। इस चिंताजनक स्थिति को उजागर करने वाला यह सर्वे फाउंडेशन के संस्थापक और प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस सुनील जागलान द्वारा उनके अंतरराष्ट्रीय अभियान “गाली बंद घर” के तहत किया गया।
सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष:
- हरियाणा में 62% लोग मां-बहन-बेटी से जुड़ी गालियों का प्रयोग करते हैं।
- दिल्ली (80%), पंजाब (78%), उत्तर प्रदेश और बिहार (74%), राजस्थान (68%) – गाली प्रचलन में शीर्ष राज्यों में शामिल।
- कश्मीर में सिर्फ 15%, जो देश में सबसे कम है।
- गुजरात (55%), मध्य प्रदेश (48%), महाराष्ट्र (58%) और अन्य राज्यों में भी गालियों का व्यवहार आम है।
- 30% महिलाएं और लड़कियां भी इन अपशब्दों का प्रयोग कर रही हैं।
डिजिटल माध्यमों का असर:
20% युवाओं ने माना कि उन्होंने सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म के जरिए गाली देना सीखा।
सर्वे का सामाजिक दायरा:
11 वर्षों में किए गए इस सर्वे में 70,000 से अधिक लोगों को शामिल किया गया, जिनमें युवा, माता-पिता, शिक्षक, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, पत्रकार, वकील, सफाई कर्मचारी और विद्यार्थी शामिल थे।
सुनील जागलान का संदेश:
जागलान ने कहा कि “भाषा ही व्यवहार की बुनियाद है”, और गालियों की शुरुआत अक्सर घर की दीवारों के भीतर से होती है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपने परिवेश में ऐसी भाषा सुनते हैं, तो वह आदत बन जाती है – जिसे लोग प्यार, मज़ाक और झगड़े में भी इस्तेमाल करने लगते हैं।
अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रभाव:
- “गाली बंद घर” अभियान 2014 में शुरू किया गया और आज यह दुनिया के कई देशों में सराहा जा रहा है।
- इसके वीडियो को 50 लाख से अधिक लोगों ने देखा और 2 लाख से ज्यादा कमेंट्स आए।
- 60,000 से ज्यादा घरों में ‘गाली बंद घर चार्ट’ लग चुके हैं।
- जागलान पर बनी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री ‘सनराइज़’ को हार्वर्ड और येल यूनिवर्सिटी में दिखाया जा चुका है।
सम्मान और उपलब्धियां:
- दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तकर्ता।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके ‘सेल्फी विद डॉटर’ अभियान की 10 बार ‘मन की बात’ में सराहना की।
- ICSE बोर्ड की आठवीं कक्षा की किताब में पाठ शामिल।
- महिला सशक्तिकरण से जुड़े 76 अभियान शुरू कर चुके हैं।
- डिबीयर्स लंदन से ₹35 लाख का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त।
- बीबीपुर मॉडल को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 100 गांवों में लागू किया।