Nurpur, Sanjeev
पौंग बांध विस्थापितों के लिए वर्षों बाद राहत की किरण नजर आई है। विस्थापन के 50 साल बाद अब उनकी प्रमुख मांगों को लेकर राज्य और केंद्र सरकारों में सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। हाई पावर कमेटी की सिफारिशों के आधार पर राजस्थान सरकार ने अहम फैसले लिए हैं, जिससे हजारों विस्थापित परिवारों को बड़ी राहत मिल सकेगी।
भूमि पर कब्ज़ा लेने की समय सीमा अब 90 की बजाय 180 दिन
राहत एवं पुनर्वास कार्यालय राजा का तालाब, जिला कांगड़ा के उपायुक्त संजय कुमार धीमान ने बताया कि पहले जिन विस्थापितों को राजस्थान में भूमि (मुरब्बा) आवंटित की जाती थी, उन्हें 90 दिन में कब्ज़ा लेना होता था। आर्थिक और सामाजिक कारणों से कई विस्थापित यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं कर पाते थे, जिससे उनका आवंटन रद्द हो जाता था। अब यह समय सीमा बढ़ाकर 180 दिन कर दी गई है।
राजस्थान में अब मिलेंगी जरूरी नागरिक सुविधाएं
राजस्थान में बस चुके पौंग विस्थापितों को मूल निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और KYC जैसी नागरिक सुविधाएं अब आसानी से मिल सकेंगी। संजय कुमार धीमान ने जानकारी दी कि हाई पावर कमेटी की सिफारिश पर राजस्थान सरकार को यह निर्देश दिए गए हैं कि इन सुविधाओं से कोई भी विस्थापित वंचित न रहे।
222 नए विस्थापितों को मिला भूमि आवंटन
हाल ही में 222 नए पौंग विस्थापितों को भूमि आवंटित की गई है। इनमें से 19 मामलों में कोर्ट के हस्तक्षेप से मुरब्बा आवंटन सुनिश्चित किया गया। संजय कुमार धीमान के अनुसार अभी भी लगभग 5,000 परिवार ऐसे हैं जो भूमि आवंटन से वंचित हैं।
6ए के तहत असली पात्र को मिलेगा हक:
एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए हाई पावर कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी आवंटित भूमि पर कोई स्थानीय व्यक्ति पहले से काबिज है, तो अब वह भूमि उस काबिज को नहीं दी जाएगी। यदि विस्थापित का उत्तराधिकारी पात्र है, तो उसी को भूमि दी जाएगी। यह फैसला विस्थापितों को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।