वॉशिंगटन | अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे भारतीय पेशेवरों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा आवंटन की मौजूदा लॉटरी प्रणाली को खत्म कर एक नई अंक आधारित ‘वेटिड सिस्टम’ लागू करने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्ताव के अनुसार, अब वीजा का चयन पूरी तरह योग्यता और वेतन स्तर के आधार पर किया जाएगा, जिससे भारतीय युवाओं और खासकर फ्रेशर्स के लिए अमेरिका का सपना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
अब किसे मिलेगा H-1B वीजा?
अमेरिकी होमलैंड सुरक्षा विभाग (DHS) के इस प्रस्तावित सिस्टम में 85,000 H-1B वीजा की सीमित संख्या के लिए:
- अधिक वेतन पाने वालों,
- अनुभवी और कुशल प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके उलट, नई प्रणाली में कम वेतन, कम अनुभव और छोटी कंपनियों के आवेदकों को बाहर का रास्ता दिख सकता है।
भारतीयों पर होगा सीधा असर
H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभ भारतीयों को मिलता रहा है। 2023 में जारी हुए कुल H-1B वीजा में से:
- 58% प्रारंभिक वीजा और
- 79% विस्तार वीजा भारतीय नागरिकों को दिए गए। लेकिन अब इस बदलाव के चलते भारतीय फ्रेशर्स और स्टार्टअप से जुड़े प्रोफेशनल्स को अमेरिका में नौकरी पाना मुश्किल हो सकता है।
अमेरिका की रणनीति क्या है?
अमेरिकी सरकार का तर्क है कि यह नई व्यवस्था देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और कुशल पेशेवरों को प्राथमिकता देने के लिए लाई जा रही है। हालांकि, इसका सीधा असर उन युवाओं पर पड़ेगा जो कम अनुभव के साथ अमेरिका में करियर की शुरुआत करना चाहते हैं।