Shimla, 28 July
सरकारी नौकरी की आस में दो दशक से संघर्ष कर रहे करुणामूल्क आश्रितों का सब्र अब जवाब देने लगा है। आज सोमवार को वे सचिवालय में शुरू हुई चार दिवसीय कैबिनेट बैठक के पहले दिन पहुंचे और सरकार से गुहार लगाई कि उनके लिए नीति बनाकर रोजगार दिया जाए।
प्रदेश में करीब 3200 करुणामूल्क आश्रित हैं, जिनमें से लगभग 3000 अभी भी रोजगार से वंचित हैं। सरकार से कई दौर की बातचीत और वादों के बावजूद कोई ठोस फैसला अब तक नहीं हो पाया है। अब इन आश्रितों की उम्र भी नौकरी के योग्य दायरे से बाहर होने लगी है।आश्रितों ने चेताया है कि यदि इस बार भी उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेंगे।
करुणामूल्क संघ की उपाध्यक्ष बॉबी शूटा ने कहा कि सरकार को बने तीन साल हो चुके हैं। चुनाव से पहले जो वादे किए गए थे, आज तक पूरे नहीं हुए। कई बार वार्ताएं हुईं लेकिन नतीजा सिफर रहा। हम उम्र की उस दहलीज पर हैं जहां नौकरी की उम्मीद भी खत्म हो रही है। हमारी मांग है कि इस चार दिवसीय कैबिनेट बैठक में करुणामूल्क आश्रितों का एजेंडा लाया जाए और जल्द रोजगार दिया जाए। अन्यथा हमें मजबूरी में फिर आंदोलन करना पड़ेगा।