Mandi, Dharamveer- हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की सराज घाटी में 30 जून की रात आई आपदा ने जनजीवन को तहस-नहस कर दिया। बादल फटने की इस घटना ने घाटी के मुख्य थुनाग बाजार को इस कदर तबाह कर दिया कि कभी ग्राहकों से चहल-पहल से गुलजार रहने वाला यह बाजार अब वीरान और श्मशान जैसे माहौल में तब्दील हो गया है।
आपदा से ठीक पाँच दिन पहले की थुनाग बाजार की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जो सराज क्षेत्र की शिक्षिका लगमा ठाकुर ने क्लिक की थीं। ये तस्वीरें बाजार की उस रौनक को दिखाती हैं, जो अब मलबे और सन्नाटे में बदल चुकी है।
शिक्षिका भी बनी आपदा की शिकार
लगमा ठाकुर, जो थुनाग के एक निजी स्कूल में अध्यापिका हैं, खुद भी इस त्रासदी की चपेट में आ गईं। वह पिछले कुछ वर्षों से थुनाग बाजार में किराए के मकान में रह रही थीं। 30 जून की रात करीब 11 बजे आए सैलाब ने उनकी बिल्डिंग को भी नहीं छोड़ा। लगमा ने बताया कि किसी तरह जान बचाकर वे भाग निकलीं, लेकिन सुबह लौटने पर देखा कि उनका आधा मकान बह चुका है। उनके कमरे के साथ-साथ ज़रूरी दस्तावेज, आभूषण और घरेलू सामान भी मलबे में समा गया। जिस बाजार की सड़कों पर कभी गाड़ियों और लोगों की भीड़ रहती थी, आज वह जगह सुनसान और श्मशान की तरह लगती है।”
व्यापारी को हुआ लाखों का नुकसान
थुनाग बाजार में पिछले कई वर्षों से व्यापार कर रहे जम्मू-कश्मीर निवासी मोहम्मद अब्दुल्ला ख्वाजा की दो दुकानें इस आपदा में पूरी तरह से कीचड़ से भर गईं। उनका पूरा स्टॉक बर्बाद हो चुका है, साथ ही एक स्टोर रूम और ऑल्टो कार भी सैलाब की भेंट चढ़ गई। ख्वाजा का अनुमान है कि उन्हें करीब 15–20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
“मैंने इस बाजार में मेहनत से कारोबार जमाया था, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया है। सरकार से मदद की उम्मीद है ताकि फिर से रोज़ी-रोटी कमा सकूं।”
— मोहम्मद अब्दुल्ला ख्वाजा, आपदा प्रभावित व्यापारी
स्थानीय प्रशासन ने उठाई पुनर्वास की मांग
ग्राम पंचायत थुनाग के उपप्रधान खेम सिंह ने जानकारी दी कि इस आपदा में 200 से अधिक दुकानें और 50 से अधिक मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि बाजार और नाले के किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की पहल की जाए।
“हम चाहते हैं कि प्रभावितों को न केवल आर्थिक मदद मिले, बल्कि सुरक्षित और स्थायी पुनर्वास भी सुनिश्चित किया जाए।”
— खेम सिंह, उपप्रधान, ग्राम पंचायत थुनाग