29 July, 2025
हनुमान जी के अनगिनत मंदिरों में सालासर बालाजी धाम का विशेष स्थान है, जहां भगवान हनुमान दाढ़ी-मूंछों वाले स्वरूप में विराजमान हैं। इस चमत्कारी मंदिर की स्थापना भक्त मोहनदास महाराज की अपार भक्ति और आस्था का परिणाम मानी जाती है।
कहानी की शुरुआत होती है वर्ष 1755 से, जब असोटा गांव में एक चमत्कारिक घटना के तहत हनुमान जी की मूर्ति प्रकट हुई। इस मूर्ति की खास बात यह थी कि इसमें हनुमान जी दाढ़ी और मूंछों के साथ एक अद्वितीय रूप में दिखे। उसी समय मोहनदास जी को स्वप्न में दर्शन देकर भगवान ने सालासर में विराजमान होने का संकेत दिया।
भक्त मोहनदास जी ने इस दिव्य आदेश को गंभीरता से लिया और उदयराम जी के सहयोग से वर्ष 1759 में सालासर में मंदिर का निर्माण करवाया। उसी मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया गया, जो आज भी भक्तों को अपनी झलक मात्र से भावविभोर कर देती है।
मंदिर की सेवा का उत्तरदायित्व उदयराम जी के वंशजों को सौंपा गया, जो आज तक पूरे श्रद्धा और समर्पण से इस परंपरा को निभा रहे हैं। सालासर बालाजी मंदिर आज न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे भारत के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है।
यह धाम उन लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है जो सच्ची भक्ति और विश्वास से भगवान से जुड़ना चाहते हैं। कहते हैं, यहां की मनोकामना सिद्धि की शक्ति इतनी प्रबल है कि हर श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता।