नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को तुरंत सड़कों से हटाकर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद इलाके में खासकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद की नगर निकायों को निर्देश दिया है कि वे सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में रखें और फिर उन्हें सड़क पर वापस न छोड़ा जाए। साथ ही, 6 से 8 हफ्तों के भीतर कम से कम 5,000 कुत्तों के लिए शेल्टर तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिनमें वैक्सीनेशन, स्टेरिलाइजेशन, सीसीटीवी निगरानी और भविष्य में विस्तार की सुविधा हो।
यह फैसला आवारा कुत्तों से परेशान रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWA) के लिए राहत की खबर है, जबकि पशु अधिकार समर्थकों ने इसे क्रूर और अव्यवहारिक बताया है। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर कुत्तों को संभालने के लिए न जमीन है और न ही पर्याप्त संसाधन।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं। कुछ ने इस फैसले का समर्थन किया और कहा कि यह सुरक्षा के लिए जरूरी है, जबकि अन्य ने इसे जानवरों के प्रति बेरहमी करार दिया। कई लोगों ने यह भी कहा कि आवारा कुत्तों के कारण बच्चों और राहगीरों की जान खतरे में है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि नगर निकायों को डॉग बाइट की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन शुरू करनी होगी और किसी भी हालत में कुत्तों को सड़क पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
अब यह देखना होगा कि दिल्ली-एनसीआर प्रशासन इस आदेश को कितनी तेजी से लागू करता है और आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान कैसे करता है।