15 August, 2025
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले के नूरपुर में स्थित श्रीबृजराज स्वामी मंदिर अपनी अनूठी विरासत और अद्भुत आस्था के लिए प्रसिद्ध है। यह दुनिया का एकमात्र मंदिर माना जाता है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनकी अनन्य भक्त मीरा की मूर्ति भी विराजमान है। सदियों से यहां दोनों की संयुक्त पूजा होती आ रही है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
16वीं शताब्दी में नूरपुर के राजा जगत सिंह (1619-1623 ई.) ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। कथा के अनुसार, चित्तौड़गढ़ प्रवास के दौरान राजा ने रात में एक मंदिर से घुंघरू और भजन की धुन सुनी। अंदर झांकने पर उन्होंने श्रीकृष्ण जी के समक्ष भजन गाती और नृत्य करती मीरा जी का दिव्य दृश्य देखा। लौटने पर उन्होंने चित्तौड़गढ़ के राजा से इन मूर्तियों को उपहारस्वरूप प्राप्त किया, साथ ही मौलश्री का पेड़ भी। नूरपुर लौटकर इन मूर्तियों को राजमहल के विशेष भाग को मंदिर का रूप देकर स्थापित किया गया।
विशेष स्थापत्य और मूर्तियां
मंदिर में काले संगमरमर से बनी भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा और अष्टधातु से बनी मीरा की प्रतिमा आज भी अलौकिक आभा बिखेर रही हैं। मंदिर की दीवारों पर राजस्थानी शैली में अंकित कृष्ण लीलाओं के चित्र भी विशेष आकर्षण हैं।
आस्था और आयोजन
मंदिर में पूरे वर्ष हिमाचल के साथ पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों से श्रद्धालु आते हैं। जन्माष्टमी और होली यहां के दो मुख्य पर्व हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर नूरपुर का माहौल ब्रज की भक्ति से सराबोर हो जाता है।
वर्ष 2009 में इस मेले को ज़िलास्तरीय और बाद में राज्य स्तरीय जन्माष्टमी महोत्सव का दर्जा मिला। मंदिर कमेटी ने यहां सीसीटीवी कैमरे, सौंदर्यीकरण और नियमित भंडारे जैसी सुविधाएं शुरू की हैं।हर दिन सुबह-शाम की आरती और भजन-कीर्तन में शामिल होकर श्रद्धालु ऐसा अनुभव करते हैं मानो वे स्वयं वृंदावन में हों।