अमेरिका | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत पर व्यापार में ‘अन्याय’ करने का आरोप लगाया है। ट्रंप का कहना है कि भारत ने अमेरिका के साथ “एकतरफा व्यापार” किया और अमेरिकी उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाया। लेकिन क्या सचमुच भारत सबसे बड़ा दोषी है? आइए आंकड़ों से समझते हैं।
आंकड़े बताते हैं असलियत
अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापार घाटा चीन के साथ है, जो 2024 तक 270 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके बाद यूरोपीय संघ (161 अरब डॉलर), मैक्सिको (157 अरब डॉलर) और वियतनाम (113 अरब डॉलर) का नंबर आता है। भारत का घाटा? केवल 41.5 अरब डॉलर। यानी अमेरिका के कुल घाटे में भारत का योगदान महज 3% है।
सेवाओं में बराबरी का व्यापार
भारत और अमेरिका के बीच सेवाओं का व्यापार भी संतुलित है।
- अमेरिका ने भारत को बेचा: 41.8 अरब डॉलर
- भारत ने अमेरिका को बेचा: 41.6 अरब डॉलर
यानि यहां भी कोई “एकतरफा फायदा” नहीं दिखता।
रक्षा व्यापार में नई ऊंचाई
साल 2000 में जहां भारत-अमेरिका रक्षा व्यापार लगभग शून्य था, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 22 अरब डॉलर तक पहुंच गया। ऐसे में ट्रंप का यह दावा कि भारत सिर्फ रूस से हथियार खरीदता है, तथ्य से परे है। भारत ने अमेरिका से भी बड़ी मात्रा में रक्षा सौदे किए हैं।
भारत ने टैरिफ घटाए, लेकिन हितों की रक्षा भी जरूरी
भारत ने तकनीक, मेडिकल उपकरण और रक्षा जैसे क्षेत्रों में टैरिफ कम किए हैं। लेकिन किसानों, छोटे उद्योगों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कुछ टैरिफ बरकरार हैं। आखिर “Buy American” की नीति की तरह भारत का भी हक है कि वह अपने हितों की रक्षा करे।
ट्रंप के कार्यकाल में क्यों नहीं तोड़ा रिश्ता?
ट्रंप 2017 से 2021 तक राष्ट्रपति रहे। अगर भारत के साथ व्यापार इतना “एकतरफा नुकसानदेह” था, तो उन्होंने उस समय इसे खत्म क्यों नहीं किया? इसके उलट, उनके कार्यकाल में ही भारत-अमेरिका संबंध और मजबूत हुए। खुद ट्रंप भारत आए, “नमस्ते ट्रंप” कार्यक्रम में हिस्सा लिया और कई समझौते साइन किए।