चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने प्रदेश में लिंगानुपात सुधार को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जिन जिलों में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया, वहां के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) पर कार्रवाई की तैयारी है। इसमें अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, करनाल, सिरसा और पलवल जिले शामिल हैं।
मंगलवार को हुई स्टेट टास्क फोर्स की बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने साफ कहा कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि इन जिलों के सीएमओ से व्यक्तिगत तौर पर जवाब-तलब किया जाएगा।
बैठक में जानकारी दी गई कि काम में लापरवाही बरतने के चलते दो आशा कार्यकर्ताओं को सेवा से हटा दिया गया है। इसी तरह पंचकूला में गर्भवती महिला और तीन बच्चियों की मौत मामले में निगरानी न करने पर संबंधित आशा वर्कर को भी बर्खास्त कर दिया गया है।
सुधीर राजपाल ने आयुष विभाग के डॉक्टरों को भी आदेश दिया कि वे एमटीपी (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी) किट की अवैध बिक्री पर नजर रखें। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि 12 सप्ताह से अधिक समय का गर्भ अवैध रूप से न गिराया जाए।
हालांकि राहत की बात यह है कि प्रदेश में लिंगानुपात में पिछले साल की तुलना में सुधार हुआ है। 31 अगस्त 2023 को लिंगानुपात 901 था, जबकि इस साल समान अवधि में यह बढ़कर 907 तक पहुंच गया है।