Dharamshala, 10 September
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायज़ा लिया और कांगड़ा हवाई अड्डे पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
बैठक में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए राज्य में भारी बारिश और भूस्खलन से हुए व्यापक नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सीमित संसाधनों से राहत कार्य चला रही है, लेकिन प्रभावी पुनर्वास और सहायता के लिए केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की ज़रूरत है।
मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण अधिनियम में छूट की मांग की ताकि प्रभावित परिवारों को पुनर्वासित किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की 68% भूमि वन क्षेत्र के अंतर्गत होने से पुनर्वास कार्य में दिक़्क़तें आती हैं।सुक्खू ने प्रधानमंत्री से दो प्रतिशत अतिरिक्त उधार सीमा की अनुमति देने की मांग की, ताकि प्रभावितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि आपदा में क्षतिग्रस्त परियोजनाओं के पुनर्निर्माण में अधिक लागत आती है, लेकिन मौजूदा मानक इस वास्तविकता को नहीं दर्शाते। जलविद्युत परियोजनाओं के लंबे समय तक बंद रहने की समस्या पर भी उन्होंने चिंता जताई और इसके आकलन में बदलाव का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने केंद्र से विकासात्मक परियोजनाओं में सहयोग, जलविद्युत उत्पादन से मुफ़्त रॉयल्टी, और 40 साल पूरे कर चुकी केंद्रीय परियोजनाओं को राज्य को हस्तांतरित करने की पुरानी मांग दोहराई। इसके अलावा, उन्होंने कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार, ऑल वेदर सुरंगों के निर्माण और वैकल्पिक पर्वतीय मार्गों के विकास की आवश्यकता पर बल दिया।बैठक में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर, सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज और कंगना रणौत सहित वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे।