ऊना | अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के तत्वावधान में आज यहाँ प्रसिद्ध कवि कथाकार, कुलदीप शर्मा के उपन्यास “मलबा” का लोकार्पण राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ऊना में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उत्तर भारत के लगभग सभी प्रदेशों से अनेक ख्यातिप्राप्त लेखक साहित्यकार और बुद्धिजीवी इस आयोजन में शामिल हुए जिनमें पंजाब शिरोमणि साहित्यकार प्रो. सुरेश सेठ, डॉ धर्मपाल साहिल , डॉ प्रोमिला अरोरा, लोकसंपर्क विभाग के पूर्व उपनिदेशक व लेखक डॉ सतीश धर, अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य विजय डोगरा , दैनिक ट्रिब्यून की पूर्व विशेष संवाददाता रंजू ऐरी, पत्रकार और कवि संदीप आकाश खड़वाल, पत्रकार सुशील शर्मा , बिंब प्रतिबिंब प्रकाशन के अनिल पांडेय , लेखक देवेन्द्र धर, बरनाला पंजाब से तरसेम, डॉ र्न्जोध सिंह, नरेश घई, शिमला से स्नेह लता नेगी, सोलन से नरेन्द्र शर्मा, रत्त्त्न चाँद निर्झर, मनमोहन शर्मा, शिमला से पवन शर्मा , सहित अनेक साहित्यकार कवि थे। सभी वक्ताओं ने मलबा उपन्यास के कथानक और भाषा शिल्प पर बात करते हुए उसे एक महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति बताया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. सुरेश सेठ ने अपने वक्तव्य में कहा कि मलबा उपन्यास का इस समय आना इस बात का सूचक है कि सामाजिक और राजनैतिक यथास्थिति के प्रतिकार के स्वर मंद नहीं पड़े हैं। उन्होंने कहा कि यह उपन्यास व्यवस्था तन्त्र की जड़ों तक जाकर उसके भ्रष्ट चेहरे को बेनकाब करता है। यह एक गहरी आश्वस्ति का विषय है कि मलबा जैसी कृतियाँ अभी रची जा रही है और यह तो ओर भी संतोषजनक है कि ऐसी कृतियों को साहित्यिक हलकों में इतने व्यापक स्तर पर स्वीकृत किया जा रहा है।
डॉ धर्मपाल साहिल ने अपने शोध पत्र में इस उपन्यास के शिल्प, भाषा और कथानक पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि कुलदीप शर्मा का यह उपन्यास न केवल अपने शिल्प में अनूठा है बल्कि हमारे आसपास के जीवन और उसमे फैली विसंगतियों के बहुत अन्तरंग दृश्य इस उपन्यास में मौजूद है। डॉ सतीश धर ने उपन्यास पर चर्चा करते हुए कहा कि यह हमारे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था की सारी पोल खोल देता है। इसमें सुक्खी जैसे पात्र समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसे भ्रष्ट तन्त्र अपने अधिकारों से और जीने की मूलभूत सुविधाओं से वंचित कर देता है। इस अवसर पर उपन्यास के लेखक कुलदीप शर्मा ने बताया कि मलबा में एक निर्धन के गिरे हुए घर से एकत्र मलबा को उपन्यास का आधार बनाते हुए राहत और कार्यवाही की दिशा में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रहार किया गया है । यह उपन्यास 160 पेज का है , इससे पूर्व कुलदीप शर्मा की कविताओं की पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं । कार्यक्रम के दुसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमे पचास से अधिक कवियों ने अपनी कविताओं से समा बाँध दिया।