नई दिल्ली | कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट को लेकर कहा है कि भारत को “ओवररिएक्ट नहीं करना चाहिए।” उनका कहना था कि यह समझौता केवल पुराने रिश्तों का औपचारिक रूप है और इसमें भारत को ज़्यादा प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है।
हालांकि, थरूर के इस रुख को अब विदेश नीति विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं ने विवादित बताया है। उनका कहना है कि इस समझौते में साफ लिखा है कि “किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा,” और इसे हल्के में लेना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान पहले से ही आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है और सऊदी अरब जैसी शक्तिशाली देश के साथ उसका रक्षा समझौता भारत के लिए सीधे खतरे का संकेत है।
थरूर ने अपने बचाव में कहा कि भारत के खाड़ी देशों के साथ राजनयिक संबंध पहले से मजबूत हैं और इस पर अधिकारी काम कर रहे हैं। लेकिन विपक्षी नेताओं का कहना है कि केवल डिप्लोमैटिक रिलेशन पर भरोसा करके सुरक्षा जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बीजेपी प्रवक्ताओं ने भी थरूर पर आरोप लगाया कि वे अक्सर पाकिस्तान के पक्ष में नरम रुख अपनाते हैं। एक नेता ने कहा, “जब पाकिस्तान खुले तौर पर भारत विरोधी साजिशों में लिप्त है, तब कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि ओवररिएक्ट न करें। यह देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।”
विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि भारत इस समझौते के प्रभावों का गहन अध्ययन करेगा। MEA प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं करेगा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या थरूर का बयान केवल राजनीतिक बयानबाज़ी था या वह सच में भारत की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।