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भारत का इकलौता सक्रिय ज्वालामुखी बैरन द्वीप फिर हुआ सक्रिय

नई दिल्ली | अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के निर्जन बैरन द्वीप पर 13 और 20 सितंबर 2025 को हल्के विस्फोट दर्ज किए गए। दोनों बार लावा और धुएं के गुबार दिखाई दिए। यह द्वीप पोर्ट ब्लेयर से लगभग 140 किलोमीटर दूर स्थित है। फिलहाल आसपास के इलाकों को कोई बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन ज्वालामुखी की गतिविधियों के चलते अंडमान में हल्का भूकंप (4.2 तीव्रता) महसूस किया गया।

बैरन द्वीप क्या है?

बैरन द्वीप अंडमान सागर में स्थित एक छोटा और निर्जन द्वीप है। यहां कोई मानव बसावट नहीं है, केवल पक्षी और जंगली जीव पाए जाते हैं। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 354 मीटर है। यह भारत का इकलौता सक्रिय ज्वालामुखी है, जो बंगाल की खाड़ी के नीचे टेक्टॉनिक प्लेट्स के टकराव से बना है। वैज्ञानिक इसे पृथ्वी की आंतरिक हलचल का अध्ययन करने के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।

हाल की गतिविधियां

13 सितंबर को पहली बार ज्वालामुखी से राख और धुआं निकला। इसके बाद 20 सितंबर को हल्का विस्फोट हुआ और लावा बहता दिखा। इन घटनाओं को ‘Strombolian type’ विस्फोट कहा जाता है, जो हल्के लेकिन बार-बार होने वाले होते हैं। जुलाई 2025 में भी यहां गतिविधियां दर्ज की गई थीं। भारतीय नौसेना ने 20 सितंबर के विस्फोट का वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें लावा की धाराएँ स्पष्ट देखी जा सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि लगातार निगरानी जारी है और किसी इलाके के लिए चेतावनी अभी तक नहीं दी गई है।

बैरन द्वीप का इतिहास

इस ज्वालामुखी की पहली सक्रियता का रिकॉर्ड 1789 में मिला। तब से यह कई बार फट चुका है। 1991 में यहां बड़ा विस्फोट हुआ था, जिसमें लावा बहुत दूर तक फैला। 2017 और 2018 में भी इसकी सक्रियता देखी गई। भूवैज्ञानिक बताते हैं कि यह द्वीप ‘Subduction Zone’ में आता है, जहां इंडियन प्लेट बर्मा प्लेट के नीचे धंसती है। इसी वजह से मैग्मा ऊपर उठकर विस्फोट करता है।

विस्फोट का खतरा

फिलहाल विस्फोट छोटे स्तर के हैं। लेकिन लंबे समय तक निकलने वाली राख समुद्री जीवन और कोरल रीफ्स को प्रभावित कर सकती है। मछलियों पर भी असर पड़ सकता है। हवाई यात्रा के लिए राख खतरनाक हो सकती है, हालांकि उड़ानें अभी पूरी तरह सुरक्षित हैं। यह द्वीप संरक्षित क्षेत्र है और आम पर्यटकों के लिए बंद है। केवल शोध दल ही यहां अध्ययन के लिए जाते हैं।

भारत के लिए महत्व

भारत में सक्रिय ज्वालामुखी बहुत कम हैं, इसलिए बैरन द्वीप का वैज्ञानिक और भूवैज्ञानिक दृष्टि से महत्व है। यह पृथ्वी की परतों और प्राकृतिक गतिविधियों को समझने में मदद करता है। इसका नाम ‘Barren’ अंग्रेजी शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है बंजर या निर्जन। यहां खेती या मानव बसावट संभव नहीं है, लेकिन यह प्रकृति की शक्ति और पृथ्वी की जीवंतता का प्रतीक माना जाता है।

Karuna

infosummerexpress@gmail.com

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