इस्लामाबाद | पाकिस्तान एक बार फिर अपनी नई पीढ़ी को गुमराह करने में जुट गया है। हाल ही में पाकिस्तान ने स्कूली पाठ्यक्रम में भारत के खिलाफ मई 2025 के तथाकथित “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर झूठ और काल्पनिक दावे शामिल किए हैं। इन किताबों में दर्ज गलत तथ्यों से साफ है कि पाकिस्तान इतिहास को अपने फायदे के लिए तोड़-मरोड़ कर पेश करने से बाज नहीं आ रहा।
किताबों में झूठे दावे
पाकिस्तान की नई किताबों में दावा किया गया है कि उसने भारत के 26 अहम ठिकानों और एयरबेस को तबाह किया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में युद्धविराम स्वीकार किया। जबकि वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान ने कश्मीर में आतंकी हमले कर माहौल बिगाड़ा और भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना के 11 एयरबेस ध्वस्त कर दिए।
झूठ नंबर 1
किताबों में लिखा गया है कि भारत ने 6 मई 2025 को पाकिस्तान पर हमला किया। असलियत यह है कि उसी दिन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों ने पहलगाम में हमला किया, जिसके बाद भारतीय सेना ने आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की।
झूठ नंबर 2
पुस्तकों में कहा गया कि पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला किया। हकीकत यह है कि पाकिस्तान ने नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया, जबकि भारत ने लाहौर, सियालकोट और इस्लामाबाद स्थित सैन्य ठिकानों पर सटीक प्रहार किया।
झूठ नंबर 3
किताबों में दावा है कि पाकिस्तान ने भारत के 26 एयरबेस तबाह किए। जबकि सत्य यह है कि भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस मिसाइलों से पाकिस्तान के 11 एयरबेस उड़ा दिए, जिनमें नूर खान, रफीकी, सरगोधा, मुरीद और रहीम यार खान प्रमुख थे।
झूठ नंबर 4
पाकिस्तान ने यह भी लिखा कि भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की अपील पर युद्धविराम मांगा। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया था कि भारत किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा। अंततः पाकिस्तान को भारत के साथ सीधे समझौते के लिए मजबूर होना पड़ा।
पाकिस्तान की पुरानी आदत
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान हमेशा से इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करता आया है। 1971 के युद्ध में भी पाकिस्तान ने खुद को विजेता बताया था, जबकि उसके 93 हजार सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था और देश का विभाजन हुआ था।