Una, Rakesh
हिमाचल प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को आधुनिक और रोजगारपरक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ऊना जिला के बरनोह में प्रदेश का पहला मुर्रा नस्ल प्रजनन एवं डेयरी फार्म स्थापित किया गया है। यह फार्म केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से तैयार किया गया है। प्रारंभिक संचालन के लिए यहां उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित नेशनल डेयरी डेवलपमेंट सेंटर से 9 शुद्ध नस्ल की मुर्रा भैंसें लाई गई हैं।
प्रारंभिक संचालन के लिए लाई गईं 9 शुद्ध नस्ल की भैंसें
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हमेशा यह कहा है कि पशुपालक प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसी दृष्टि से सरकार किसानों को उच्च नस्ल के पशु उपलब्ध कराकर उनकी आमदनी बढ़ाने और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। बरनोह का यह फार्म पशुपालकों के लिए किसी सौगात से कम नहीं माना जा रहा।
बरनोह मुर्रा प्रजनन फार्म के सहायक निदेशक राकेश भट्टी ने बताया कि फार्म का मुख्य उद्देश्य शुद्ध नस्ल की मुर्रा भैंसों का प्रजनन करना है। फार्म में शुद्ध नस्ल के कटड़े तैयार किए जाएंगे और भैंसों से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले वीर्य को विभागीय सीमन केंद्रों के माध्यम से पूरे प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा।उन्होंने बताया कि चयन प्रक्रिया में भैंसों की पीढ़ीवार उत्पादन क्षमता और चिकित्सीय जांच को प्राथमिकता दी गई। लाई गई सभी भैंसे गाभिन हैं और अगले दो-तीन महीनों में इनके प्रजनन के साथ दूध उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। फार्म में आगामी समय में पशुओं की संख्या बढ़ाकर 50 तक की जाएगी।
फार्म में पशुपालकों को दिया जाएगा एक सप्ताह का प्रशिक्षण
सहायक निदेशक ने आगे बताया कि प्रारंभिक चरण में यहां उत्पादित दूध स्थानीय डेयरी केंद्रों को उपलब्ध कराया जाएगा और भविष्य में उत्पादन बढ़ने पर मिल्कफेड को भी आपूर्ति की जाएगी। फार्म में पशुपालकों को एक सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जो डेयरी यूनिट चलाने और ऋण सुविधा प्राप्त करने में सहायक होगा।प्रशिक्षण के दौरान दूध उत्पादन, पशुपालन प्रबंधन, दूध विपणन के साथ-साथ पनीर, खोया और घी जैसे उत्पाद बनाने की आधुनिक तकनीक भी सिखाई जाएगी।