पलवल | हरियाणा के पलवल में जिला परिषद के ACEO युधिष्ठिर की MBA डिग्री को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है। जिला परिषद की चेयरपर्सन रेखा ने मुख्यमंत्री नायब सैनी, पंचायत मंत्री कृष्णलाल पंवार और प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत भेजकर डिग्री की वैधता पर सवाल उठाया है। युधिष्ठिर 2021 से पंचायत विभाग में कार्यरत हैं और वर्तमान में जिला परिषद में ACEO के पद पर तैनात हैं।
फर्जी डिग्री का स्रोत
संदेह की गई MBA डिग्री उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी से प्राप्त बताई जा रही है। यह वही यूनिवर्सिटी है जहां यूपी की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फर्जी मार्कशीट, डिग्री, प्रोविजनल और माइग्रेशन सर्टिफिकेट जारी करने वाले रैकेट का खुलासा किया था। यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा, प्रो-वाइस चांसलर नितिन कुमार सिंह समेत 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
शिकायत और जांच
चेयरपर्सन रेखा ने आरोप लगाया कि युधिष्ठिर ने न केवल फर्जी डिग्री हासिल की, बल्कि करीब 18 रिश्तेदारों को भी इसी यूनिवर्सिटी से डिग्रियां दिलवाईं, जिनके आधार पर वे पंचायत विभाग में नियुक्त हुए। पहली शिकायत मार्च 2023 में गांव सिहोल के राजकुमार ने की थी, लेकिन उस समय जांच में युधिष्ठिर ने यूनिवर्सिटी के गिरोह की मदद से वैधता साबित कर दी थी।
पुनः जांच और यूनिवर्सिटी की पुष्टि
सप्टेंबर 2025 में पुनः जांच की गई। 16 सितंबर को यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट आई कि युधिष्ठिर ने कभी मोनाड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई नहीं की। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि छात्र संख्या MU1719MBA50942 के नाम से कोई नामांकन दर्ज नहीं है।
ACEO का बयान और प्रशासन की प्रतिक्रिया
युधिष्ठिर ने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उनकी डिग्री पहले भी जांच में सही पाई गई थी। उन्होंने दावा किया कि चेयरपर्सन द्वारा प्रस्तुत वेरिफिकेशन लेटर नकली है। डीसी हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि शिकायत पर जांच चल रही है और निष्कर्ष आने पर ही आगे कार्रवाई होगी।
मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जीवाड़ा
इस साल मई में यूपी STF ने मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री रैकेट पकड़ा। यूनिवर्सिटी के चेयरमैन और प्रो-वाइस चांसलर सहित 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच में 1,372 नकली डिग्रियां, 262 प्रोविजनल और माइग्रेशन सर्टिफिकेट्स, कई खाली सर्टिफिकेट्स, प्रिंटर और सील बरामद हुए।
डिग्री की कीमत और राज्य सरकार की कार्रवाई
एसटीएफ के अनुसार, रैकेट में डिग्री की कीमत ₹50,000 से लेकर ₹4 लाख तक थी। जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करने की सिफारिश की है।