नई दिल्ली/पलवल | भारत में पाकिस्तान उच्चायोग (PHC) के वीजा डेस्क में जासूसी और रिश्वतखोरी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में हरियाणा के पलवल जिले के वसीम अख़्तर को गिरफ्तार किया गया है। वसीम पर आरोप है कि उन्होंने वीजा प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों से रिश्वत लेकर संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान भेजीं।
गिरफ्तारी और आरोप
वसीम अख़्तर, जो मूल रूप से पलवल जिले के गांव कोट, हठिन के निवासी हैं, को 30 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (OSA & BNS) के तहत गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि वसीम ने PHC के अधिकारी जाफर (मुज़म्मिल हुसैन) को 20,000 रुपए की रिश्वत दी और इसके बदले वीजा प्रक्रिया पूरी करवाई।
जासूसी के दौरान वसीम ने अपने बैंक खाते, सिम कार्ड और ओटीपी भी पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारियों को उपलब्ध कराए। इसके अलावा उन्होंने भारतीय सेना से संबंधित संवेदनशील जानकारियां साझा करने में भी मदद की। जांच में सामने आया कि वसीम ने 4-5 लाख रुपए की धनराशि मध्यस्थों के माध्यम से PHC तक पहुंचाई।
पूर्व मॉड्यूल और अन्य पृष्ठभूमि
जांच में यह भी पता चला कि इस नेटवर्क के अन्य आरोपी पंजाब के मलेरकोटला और हरियाणा के नूह से भी जुड़े हुए थे। मलेरकोटला के PHC कर्मचारी डैनिश (एहसान-उर-रहीम) और स्थानीय नागरिकों को वीजा के बहाने संवेदनशील रक्षा जानकारी देने के लिए तैयार किया गया था।
नूह मॉड्यूल में आरोपी अर्मान ने सिम कार्ड और रक्षा प्रदर्शन से संबंधित वीडियो PHC को उपलब्ध कराए। इन घटनाओं से साफ़ हो गया कि PHC का वीजा डेस्क जासूसी और रिश्वतखोरी का केंद्र बन चुका है।
सरकारी कार्रवाई
जांच एजेंसियों ने वसीम अख़्तर के खिलाफ कड़ा मामला दर्ज किया है। PHC के अधिकारी जाफर और डैनिश को PNG घोषित किया जा चुका है। अब इस जासूसी और रिश्वतखोरी नेटवर्क के अन्य आरोपियों की भी तलाश की जा रही है।
विशेष नोट
पुलिस का कहना है कि इस मामले से यह साबित होता है कि वीजा डेस्क का दुरुपयोग कर लोगों को संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। सरकार ने इस घटना के बाद सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।