चंडीगढ़ | आई.पी.एस. अधिकारी पूरन कुमार के आत्महत्या मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री और दलित नेता रामदास अठावले ने सोमवार को मुख्यमंत्री नायब सैनी से अहम मुलाकात की। यह बैठक करीब 40 मिनट तक चली और इसमें कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं।
बैठक में अठावले के करीबी और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) की हरियाणा इकाई के प्रदेशाध्यक्ष रवि कुंडली, तथा दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री संदीप वाल्मीकि भी मौजूद थे। दोनों का दावा है कि बैठक में मुख्यमंत्री नायब सैनी केवल प्रतीकात्मक रूप में मौजूद थे, जबकि असली निर्णय चीफ प्रिंसीपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर और चीफ सेक्रेटरी अनुराग रस्तोगी द्वारा लिए जा रहे थे।
बैठक में मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि “मैं तो एक चपरासी को भी नहीं हटा सकता।” पत्रकारों से बातचीत में संदीप वाल्मीकि ने बताया कि बैठक में रामदास अठावले की मांग पर नायब सैनी को डी.जी.पी. शत्रुजीत कपूर और रोहतक के एस.पी. नरेंद्र बिजारणिया को सस्पेंड करने का निर्देश देना चाहिए था। लेकिन बैठक में मौजूद राजेश खुल्लर ने इसे असंभव बताते हुए कई तकनीकी मुद्दे गिनाए।
वाल्मीकि ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार के असली फैसले राजेश खुल्लर, डी.जी.पी. शत्रुजीत कपूर और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा लिए जा रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री नायब सैनी केवल औपचारिक रूप में मौजूद हैं।