वॉशिंगटन/कीव | यूक्रेन और रूस के बीच चल रही शांति वार्ता में अभी तक कोई ठोस समझौता नहीं बन पाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कथित तौर पर यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल द्वारा पेश किए गए अग्रिम नक्शे देखकर नाराज हो गए और उन्हें व्हाइट हाउस बैठक में फेंक दिया।
घटना 17 अक्टूबर 2025 को हुई, जब यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता में नक्शे पेश किए। ट्रंप का जोर था कि यूक्रेन रूस की शर्तें स्वीकार करे और पूर्वी क्षेत्र डोनबास रूस को सौंप दे।
नक्शों की रणनीतिक भूमिका
राजनीतिक भूगोलवेत्ताओं के अनुसार नक्शे शांति वार्ता और क्षेत्रीय संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बोस्निया, काकेशस और यूक्रेन में यह देखा गया कि नक्शों पर रेखाएं खींचने से ही युद्धविराम या क्षेत्रीय विभाजन की दिशा तय होती है।
भावनात्मक बनाम व्यावसायिक दृष्टिकोण
जेलेंस्की और यूक्रेनी जनता भूमि की अखंडता और भावनात्मक महत्व के पक्षधर हैं, जबकि ट्रंप इसे व्यावसायिक सौदे की तरह देखते हैं। सैनिकों की कुर्बानी और भूमि का प्रतीकात्मक महत्व उनके नजरिए में कम है।
गलतफहमियां और कूटनीतिक बाधाएं
अगस्त 2025 में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने रूसी प्रस्ताव की व्याख्या में गलती की, जिससे अमेरिका ने नए प्रतिबंध टाल दिए। अलास्का शिखर सम्मेलन में पुतिन ने युद्धविराम की शर्तें ठुकराईं, लेकिन प्रस्ताव दिया कि रूस डोनबास पर कब्जा करे और जापोरिज्जिया-खेरसॉन से पीछे हटे।
युद्ध को संपत्ति की तरह देखना
ट्रंप युद्ध को रियल एस्टेट सौदे की तरह देखते हैं और मानते हैं कि डोनबास को मौजूदा युद्ध रेखाओं के आधार पर बांट देना चाहिए। वहीं, जेलेंस्की इसे राष्ट्रीय और भावनात्मक दृष्टिकोण से देखते हैं। इन भिन्न दृष्टिकोणों और नक्शों के कारण शांति वार्ता जटिल हो गई है, और यूक्रेन के भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है।