नई दिल्ली। इजरायली सेना की मुख्य कानूनी अधिकारी (Advocate General) मेजर जनरल यिफात तोमर-येरुशालमी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह कदम उस वीडियो जांच के बाद उठाया, जिसमें गाजा युद्ध के दौरान इजरायली सैनिकों को एक फिलिस्तीनी बंदी के साथ दुर्व्यवहार करते हुए देखा गया था।
मेजर जनरल तोमर-येरुशालमी ने अपने इस्तीफे में स्वीकार किया कि उन्होंने अगस्त 2024 में इस वीडियो के प्रकाशन की अनुमति दी थी, जो बाद में लीक हो गया। उन्होंने कहा कि भले ही एसडी तेइमान डिटेंशन कैंप में रखे गए बंदी “सबसे खतरनाक आतंकवादी” हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संभावित दुर्व्यवहार की जांच से छूट मिल सकती है।
वीडियो लीक के बाद बढ़ा विवाद, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल
गाजा युद्ध के दौरान फिलिस्तीनी कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार के वीडियो लीक होने के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने इस पर गंभीर आपत्ति जताई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली सेना फिलहाल दर्जनों दुर्व्यवहार मामलों की जांच कर रही है। जांच के दौरान वीडियो लीक में मेजर जनरल तोमर-येरुशालमी का नाम सामने आने के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का फैसला किया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और इस्तीफे पर विवाद
तोमर-येरुशालमी के इस्तीफे पर इजराइल के पुलिस मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि उन्होंने सही निर्णय लिया है। उन्होंने अधिक कानूनी अधिकारियों से भी जांच कराने की मांग की।
वहीं, कुछ नेताओं ने कहा कि “जो सैनिकों पर झूठे आरोप लगाए, वह आईडीएफ की वर्दी पहनने के योग्य नहीं।”
बेन-ग्वीर ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें वे इजरायली जेल में बंधे फिलिस्तीनी कैदियों के पास खड़े दिखे और कहा कि “ये वही हमलावर हैं जिन्होंने 7 अक्टूबर को हमला किया था, इन्हें मौत की सजा मिलनी चाहिए।”
7 अक्टूबर के हमले से जुड़ा वीडियो बना विवाद का कारण
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कथित दुर्व्यवहार का वीडियो एन12 न्यूज चैनल पर लीक हुआ था। इसमें सैनिकों को एक बंदी को घसीटते और उसके चारों ओर घेराव करते हुए दिखाया गया है।
यह फुटेज एसडी तेइमान डिटेंशन कैंप का बताया जा रहा है, जहां 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमले में शामिल कुछ हमास आतंकवादियों को रखा गया था। बाद में गाजा में हुए युद्ध के दौरान पकड़े गए कई फिलिस्तीनियों को भी यहां लाया गया।