जालंधर। जिले में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन ने 26 क्लस्टर अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किए हैं। प्रशासन ने अधिकारियों से पूछा है कि फील्ड में टीमें मौजूद होने के बावजूद पराली कैसे जलाई गई?
प्रशासन के अनुसार, फील्ड में तैनात अधिकारी अब यह बताएंगे कि पराली जलने के समय वे कहां थे और उन्होंने क्या कार्रवाई की। अधिकारियों के जवाब के बाद आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। संभावना है कि यह रिपोर्ट अधिकारियों की सर्विस बुक में दर्ज की जा सकती है।
शाहकोट में सबसे ज्यादा मामले, अब तक 34 घटनाएं दर्ज
जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक पराली जलाने के मामले शाहकोट सब डिविजन के मेहतपुर और लोहिया क्षेत्रों में दर्ज हुए हैं — यहाँ 7 घटनाएं रिपोर्ट की गईं। इसके अलावा, करतारपुर, नूरमहल और भोगपुर में एक-एक तथा नकोदर में दो मामले सामने आए।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के मुताबिक, शुक्रवार शाम तक सैटेलाइट से कुल 34 घटनाएं रिपोर्ट हुईं। इनमें से 12 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि अन्य की जांच जारी है।
जालंधर का अधिकतम AQI शुक्रवार को 302 दर्ज हुआ, जो वीरवार के मुकाबले थोड़ा कम रहा। अब तक पराली जलाने के 19 मामलों में रेड एंट्री और जुर्माने की कार्रवाई की जा चुकी है।
प्रशासन की निगरानी व्यवस्था और फील्ड टीमें सक्रिय
जालंधर जिले में कुल 6 सब डिविजन हैं — जालंधर-1, जालंधर-2, शाहकोट, नकोदर, आदमपुर और फिल्लौर।
हर सब डिविजन में एसडीएम अपनी टीमों के साथ सैटेलाइट अलर्ट के आधार पर निगरानी करते हैं। आग लगने की सूचना मिलते ही टीमें मौके पर पहुंचकर जांच करती हैं।
इन टीमों में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कृषि विभाग, पटवारी, और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल होते हैं।
जहां भी लापरवाही या उदासीनता पाई गई, वहां के एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।