चंडीगढ़ | राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए महिलाओं सहित समाज के हर वर्ग का योगदान आवश्यक है। वह पतंजलि विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थीं।
राष्ट्रपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत कुल छात्रों में 62 प्रतिशत छात्राएं हैं, जबकि इस बार डिग्री प्राप्त करने वालों में 64 प्रतिशत छात्राएं शामिल हैं। पदक प्राप्त करने वाली छात्राओं की संख्या भी छात्रों की तुलना में चार गुना अधिक रही।
मुर्मू ने कहा, “ये आंकड़े सिर्फ संख्याएं नहीं हैं, बल्कि महिलाओं के नेतृत्व में आगे बढ़ते विकसित भारत की झलक हैं। यह वही परंपरा है जिसमें गार्गी, मैत्रेयी, अपाला और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने समाज को बौद्धिक और आध्यात्मिक दिशा दी थी।”
उन्होंने कहा कि भारत की 140 करोड़ की आबादी में आधी हिस्सेदारी महिलाओं की है, इसलिए “अगर केवल बेटे आगे बढ़ेंगे और बेटियां पीछे रह जाएंगी, तो विकसित भारत का सपना अधूरा रह जाएगा।”
राष्ट्रपति ने योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में पतंजलि विश्वविद्यालय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि हिमालय की गोद से बहती पवित्र नदियों के साथ अब “ज्ञान-गंगा” की एक नई धारा भी पतंजलि विश्वविद्यालय के रूप में जुड़ गई है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के समन्वय से जीवन में आगे बढ़ें। साथ ही, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने को मानवता के भविष्य के लिए जरूरी बताया।
मुर्मू ने विश्वास जताया कि पतंजलि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।