चंडीगढ़ | हरियाणा की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंचने वाली है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह एवं वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह अब दोबारा इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) में वापसी करने जा रहे हैं। पार्टी से लंबे समय से उनके रिश्तों की चर्चा चल रही थी, जो अब बुधवार को औपचारिक रूप से हकीकत बन जाएगी।
प्रो. संपत सिंह बुधवार को चंडीगढ़ में इनेलो सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उनके साथ उनके बेटे गौरव संपत सिंह भी इनेलो में शामिल होंगे। इनेलो मुख्यालय ने इस खबर की आधिकारिक पुष्टि की है। अभय चौटाला इस अवसर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संपत सिंह की वापसी इनेलो के लिए मनोबल बढ़ाने वाली साबित होगी, वहीं कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका मानी जा रही है।
“देवीलाल की विचारधारा में फिर लौटेंगे संपत सिंह”
इनेलो प्रमुख अभय चौटाला पहले ही संकेत दे चुके थे कि संपत सिंह हमेशा से चौ. देवीलाल की नीतियों के समर्थक रहे हैं। चौटाला ने कहा था कि “संपत सिंह हमारे पुराने साथी हैं, जो जनता के बीच फिर से संघर्ष की राह अपनाएंगे।” सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच बीते दिनों गहन चर्चा हुई थी और अब यह राजनीतिक पुनर्मिलन पार्टी के लिए नई ऊर्जा लेकर आएगा।
कांग्रेस पर साधा था निशाना
हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे अपने इस्तीफे में प्रो. संपत सिंह ने हरियाणा कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने लिखा था कि “पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। गुटबाजी, अवसरवाद और व्यक्तिगत स्वार्थों ने संगठन को कमजोर कर दिया है।” उन्होंने यह भी कहा कि टिकट वितरण में उपेक्षा और स्थानीय नेतृत्व से मतभेद अब असहनीय हो गए थे।
देवीलाल जयंती पर दिखे थे संकेत
25 सितंबर को रोहतक में आयोजित चौ. देवीलाल जयंती समारोह में संपत सिंह और अभय चौटाला एक साथ मंच साझा कर चुके थे। उसी कार्यक्रम में संपत सिंह ने अभय चौटाला की राजनीति की खुलकर प्रशंसा की थी। उसी वक्त से यह कयास लगाए जा रहे थे कि उनकी इनेलो में वापसी तय है।
गौरतलब है कि प्रो. संपत सिंह का राजनीतिक सफर चौ. देवीलाल की विचारधारा से ही शुरू हुआ था। वे ओमप्रकाश चौटाला सरकार में वित्त मंत्री भी रहे और अपनी प्रशासनिक क्षमता के लिए जाने गए। कांग्रेस में शामिल होने के बावजूद उन्होंने कभी अभय चौटाला के खिलाफ तीखा बयान नहीं दिया। अब उनका “घर वापसी” का फैसला हरियाणा की राजनीति में नए समीकरण गढ़ सकता है।