नई दिल्ली | अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की रफ्तार फिलहाल थम गई है। कीमती धातु की कीमतें करीब एक महीने के निचले स्तर पर बनी हुई हैं। केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से जल्द ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होने से सोने पर दबाव बढ़ा है।
वर्तमान में वैश्विक बाजार में सोना लगभग $3,940 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जो अक्टूबर की शुरुआत के बाद का सबसे निचला स्तर है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के हालिया बयान के बाद दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती की संभावना 90% से घटकर 69% रह गई है, जिससे निवेशकों का झुकाव सोने से हटकर अन्य परिसंपत्तियों की ओर बढ़ा है।
इसके साथ ही, चीन सरकार द्वारा गोल्ड सेलर्स को मिलने वाली टैक्स छूट समाप्त करने के फैसले का भी असर बाजार पर दिख रहा है। टैक्स बढ़ने से एशियाई देशों में खुदरा स्तर पर सोने की खरीदारी घटने की आशंका है, जो वैश्विक मांग को कमजोर कर सकती है और कीमतों पर और दबाव डाल सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो निवेशक सोने को अब भी एक सुरक्षित निवेश विकल्प (Safe Haven) के रूप में अपनाते रहेंगे। ऐसे में आर्थिक परिस्थितियों के बिगड़ने पर सोने की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल सकती है।