Mandi, Dharamveer
साल 2009 में स्थापित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी ने मात्र 16 वर्षों में शोध और नवाचार के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली है। संस्थान की ड्रोन टेक्नोलॉजी लैब अब रक्षा क्षेत्र में भी अपना योगदान दे रही है। हाल ही में मई 2025 में जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया, तब आईआईटी मंडी द्वारा विकसित ड्रोन इस मिशन में सहयोग के लिए भेजे गए। इस उपलब्धि की जानकारी आईआईटी मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने वीरवार को आयोजित 13वें दीक्षांत समारोह के दौरान दी।
602 विद्यार्थियों को बांटी उपाधियां, जिनमें 69 पीएच.डी. के शोधार्थी
समारोह में कुल 602 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें 292 स्नातक, 241 स्नातकोत्तर और 69 पीएच.डी. के शोधार्थी शामिल रहे। इस अवसर पर अकादमिक उत्कृष्टता, नवाचार, शोध और नेतृत्व में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पदक और पुरस्कार भी प्रदान किए गए।
13वें दीक्षांत समारोह में निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने दी जानकारी
निदेशक प्रो. बेहरा ने कहा कि आईआईटी मंडी के शोधकर्ता देश के तकनीकी विकास में अहम योगदान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा विकसित अर्ली वार्निंग सिस्टम न केवल भूस्खलन की जानकारी दे रहा है, बल्कि अब भूकंप की पूर्व चेतावनी देने में भी सक्षम हो गया है। इस सिस्टम के सफल संचालन से हिमाचल प्रदेश सहित पहाड़ी इलाकों में आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाने में बड़ी मदद मिल रही है।उन्होंने कहा कि ड्रोन टेक्नोलॉजी लैब में तैयार किए जा रहे उन्नत ड्रोन न केवल निगरानी और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए उपयोगी हैं, बल्कि अब सेना की रणनीतिक जरूरतों को भी पूरा कर रहे हैं। प्रो. बेहरा ने इस उपलब्धि को संस्थान के शोधार्थियों और संकाय की कड़ी मेहनत का परिणाम बताया।
समारोह के दौरान निदेशक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिन उनके लिए गौरव का क्षण है। “आप आज जो डिग्रियाँ प्राप्त कर रहे हैं, वे सिर्फ एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि आपकी मेहनत और समर्पण का प्रतीक हैं,”।कार्यक्रम में प्रो. शेखर सी. मांडे, पूर्व महानिदेशक, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं डॉ. जगन्नाथ नायक, निदेशक, सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज़ (चेस), डीआरडीओ, और प्रो. बुदराजू श्रीनिवास मूर्ति, निदेशक, आईआईटी हैदराबाद विशिष्ट अतिथि रहे। समारोह की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कंवल जीत सिंह ढिल्लों, अध्यक्ष, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, आईआईटी मंडी ने की।यह दीक्षांत समारोह इस मायने में भी ऐतिहासिक रहा कि इस वर्ष संस्थान से बी.टेक-एम.टेक द्वैध डिग्री, बी.टेक विथ सेकंड मेजर और बी.टेक विथ स्पेशलाइजेशन कार्यक्रमों के पहले बैच के विद्यार्थी स्नातक हुए।