Dharamshala, Rahul
हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना अब गांवों की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही है। पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाले किसान अब मछली पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि मत्स्य पालन को ग्रामीण क्षेत्रों में एक स्थायी, लाभकारी और आधुनिक व्यवसाय के रूप में विकसित किया जाए।
राज्य के उष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में कार्प प्रजाति की मछलियों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। इसी को देखते हुए सरकार ने मीठे पानी में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए योजना के तहत आकर्षक सब्सिडी प्रदान की है। मत्स्य पालन विभाग के अनुसार, इस योजना में तालाब निर्माण और पहले वर्ष की इनपुट लागत, जैसे—मछली बीज, चारा व औषधि—पर 80 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध है। एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 12.40 लाख रुपये की यूनिट लागत तय की गई है, जिसमें 8.40 लाख रुपये तालाब निर्माण और 4 लाख रुपये इनपुट सामग्री के लिए शामिल हैं।
नूरपुर के लवली कुमार बताते हैं कि योजना के तहत उन्हें 1 लाख 39 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। विभाग ने उन्हें मछली बीज सहित अन्य तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करवाई। वे आज सफलतापूर्वक मछली पालन कर रहे हैं और दो अन्य लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।नू
रपुर के ही परगना गांव के राकेश कुमार के परिवार ने भी विभाग की सहायता से तालाब निर्माण करवाया है। उन्हें योजना के अंतर्गत 1 लाख 24 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। राकेश बताते हैं कि इस व्यवसाय से उनके साथ दो और लोग जुड़े हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने बताया कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए स्थानीय संसाधनों पर आधारित योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है। पौंग बांध क्षेत्र और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को इस योजना का विशेष लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं को स्वरोजगार प्रदान कर रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।