Shimla,17 November
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया लगातार खिंचती जा रही है और नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा अब भी अधर में लटकी हुई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भंग किए हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। लोकसभा चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद 6 नवंबर 2024 को संगठन को भंग किया गया था और केवल प्रतिभा सिंह को अध्यक्ष पद पर बनाए रखा गया था। इसके बाद से नई टीम के गठन को लेकर पार्टी हाईकमान कई दौर की बैठकों के बावजूद कोई अंतिम निर्णय नहीं ले सका है।
हाल ही में दिल्ली में राहुल गांधी की मौजूदगी में छह बड़े कांग्रेस नेताओं से अलग-अलग बातचीत की गई। इनमें पूर्व अध्यक्ष कुलदीप राठौर, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार, विधायक सुरिंदर सिंह सुल्तानपुरी, आशीष बुटेल और सुरेश कुमार शामिल थे। माना जा रहा था कि इन चर्चाओं के बाद नए अध्यक्ष का चयन अंतिम चरण में पहुंच जाएगा। लेकिन इसके उलट पार्टी ने जिला अध्यक्षों के चयन के लिए 12 जिलों में 12 ऑब्जर्वर नियुक्त करने का निर्णय ले लिया।इस कदम ने संगठन के भीतर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। कई नेताओं का कहना है कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का अधिकार नए प्रदेश अध्यक्ष के पास होना चाहिए था। ऑब्जर्वर नियुक्त करना तो अध्यक्ष चुनने के बाद की प्रक्रिया होती है, ऐसे में हाईकमान के इस फैसले ने असमंजस पैदा कर दिया है। इससे उन नेताओं का उत्साह भी कम होता दिख रहा है जो अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल रहे हैं।
कुछ समय पहले तक यह उम्मीद थी कि बिहार विधानसभा चुनाव के मतदान खत्म होते ही हिमाचल कांग्रेस में संगठन को लेकर बड़ा निर्णय आएगा। लेकिन अब स्थिति और अधिक खिंचती जा रही है। वहीं, 26 नवंबर से विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है, ऐसे में पार्टी को सत्र के दौरान मजबूत संगठन की जरूरत और भी महसूस होगी।ऐसे में चर्चा है कि संगठन के अभाव में कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है और पार्टी को इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। बद्दी में हुई बैठक के बाद प्रदेश पदाधिकारियों को कार्यक्रम सौंपे जा चुके हैं।
इस बीच, हिमाचल की कांग्रेस सरकार भी 11 दिसंबर को अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे करने जा रही है। चुनावी मोड में प्रवेश कर रही सरकार को अपनी उपलब्धियाँ जनता तक पहुंचाने के लिए एक कार्यशील संगठन की आवश्यकता होगी। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान पर संगठन को जल्द से जल्द मजबूत करने का दबाव बढ़ता दिख रहा है।