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विमल नेगी मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: CBI की जांच पर गंभीर सवाल, शिमला पुलिस को बताया अधिक सक्षम

Shimla, 19 November-:हिमाचल पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी विमल नेगी की संदिग्ध मौत की जांच कर रही सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। सोमवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सीबीआई के कुछ अधिकारियों को “पूरी तरह फर्जी और अयोग्य” बताते हुए उनकी क्षमता और जांच की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे अधिकारी सेवा में बने रहने के योग्य ही नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने न तो निष्पक्ष जांच की और न ही मामले में कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत किया।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि सीबीआई की जांच शुरू से ही ढुलमुल, अस्पष्ट और अटकलों पर आधारित रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 80 पेज के एफिडेविट में भी एक भी ठोस सबूत मौजूद नहीं है, जिससे यह साफ होता है कि एजेंसी ने स्वतंत्र और पेशेवर जांच करने में पूरी तरह विफलता दिखाई है।

पीठ ने जांच के दौरान पूछे गए सवालों पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि यही जांच का स्तर है, तो यह सीबीआई की बहुत खराब छवि पेश करता है। अदालत ने कहा कि अभियुक्त से पूछताछ में भी अधिकारी बचकाने सवाल कर रहे हैं, जिनसे किसी भी तरह की गंभीर जानकारी मिलने की उम्मीद नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी आरोपी का चुप रहना असहयोग नहीं माना जा सकता, क्योंकि चुप रहने का अधिकार भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई पर आरोप लगाया कि वह न केवल SIT अधिकारियों को पेन ड्राइव के नाम पर निशाना बना रही है, बल्कि जांच में निष्पक्षता का अभाव भी साफ दिखाई देता है। अदालत ने टिप्पणी की कि जांच राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होती है और इसमें न तो कोई आपराधिक संबंध सामने आया और न ही कोई पुख्ता सामग्री जुटाई गई।

अदालत ने कहा कि इस मामले में शिमला पुलिस अधिक सक्षम और प्रभावी जांच कर सकती है, जबकि सीबीआई लगातार मनगढ़ंत थ्योरी पर काम कर रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आपराधिक मामलों में आरोप लगाने की एक सीमा होती है और ऐसे आधारहीन आरोप किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हैं।

कोर्ट के अनुसार

  1. कोई स्वतंत्र जांच नहीं की गई, एक भी विश्वसनीय साक्ष्य एकत्र करने में विफल।
  2. एसीएस होम की रिपोर्ट केवल अटकलों पर आधारित, कोई ठोस सबूत नहीं।
  3. पेन ड्राइव के नाम पर SIT अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है।
  4. जांच में निष्पक्षता का पूर्ण अभाव।
  5. पूरी जांच राजनीतिक रूप से प्रेरित दिखाई देती है।
  6. कोई आपराधिक संबंध नहीं मिले, केवल अनुमान और कल्पना—जांच अस्पष्ट और अधूरी।
  7. जांच अधिकारी अक्षम और फर्जी; CBI बेईमानी भरे तरीके अपना रही है।
  8. ऊपर से मिले निर्देशों पर झूठे बयान देने के लिए दबाव बनाना और मनगढ़ंत कहानी तैयार करना।
  9. आपराधिक मामलों में आरोपों की एक सीमा होती है; ऐसे आधारहीन और बेतुके आरोप नहीं लगाए जा सकते।
    10. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शिमला पुलिस इस मामले की बेहतरीन जांच कर सकती है

Chandrika

chandrika@summerexpress.in

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