चंबा | चंबा जिले के पहाड़ी इलाकों में सेब के बगीचों को इस समय बुली एफर्ड नामक बीमारी से नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। ठंड के मौसम में पेड़ों पर सफेद रुई जैसी परत बनकर यह बीमारी फैलती है, जिससे सेब के पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगते हैं।
उद्यान विभाग ने बागवानों को समय रहते सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग के उप निदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने बताया कि बीमारी से निपटने के लिए अक्टूबर के महीने से ही पेड़ों की कांट-छंटाई करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उचित कांट-छंटाई से अधिकांश पेड़ इस बीमारी से बचाए जा सकते हैं।
डॉ. शाह ने कहा कि अगर पेड़ों में बीमारी अधिक फैल जाए, तो तब रासायनिक छिड़काव करना चाहिए। हालांकि अधिकांश मामलों में सही कांट-छंटाई और देखभाल से यह बीमारी नियंत्रित की जा सकती है। उन्होंने बागवानों से आग्रह किया कि वे उद्यान विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें और पेड़ों की नियमित निगरानी करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां अधिक ठंड पड़ती है, वहां यह बीमारी हर साल देखने को मिलती है। इसलिए समय पर सावधानी और उचित देखभाल ही सबसे प्रभावी उपाय है। विभाग ने यह भी कहा कि अत्यधिक रासायनिक प्रयोग से बचना चाहिए, केवल तभी छिड़काव करें जब समस्या गंभीर हो।
इस उपाय से बागवान अपने बगीचों में सेब के पेड़ों को स्वस्थ रख सकते हैं और उत्पादन में भी बढ़ोतरी सुनिश्चित कर सकते हैं।