Shimla, Sanju-:हिमाचल प्रदेश में अपनी लंबित मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे दृष्टिहीन जन संगठन ने सरकार के प्रति गहरी नाराजगी जताते हुए आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी दी है। संगठन बीते 764 दिनों से राजधानी शिमला में धरने पर बैठा है, वहीं सचिवालय के बाहर खुले आसमान के नीचे भी पिछले एक महीने से लगातार प्रदर्शन जारी है। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद सरकार द्वारा उनकी मांगों पर ध्यान न दिए जाने से नाराज संगठन ने अब 3 दिसंबर को चक्का जाम और 4 दिसंबर को मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ओक ओवर के घेराव का ऐलान किया है।
हमारी आवाज सुनने वाला कोई नहीं
संगठन के सदस्यों का कहना है कि उन्हें सड़क पर संघर्ष करते हुए दो साल से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं दिख रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार वार्ताएं हुईं, लेकिन कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। सदस्यों के अनुसार, “हमारी आवाज सुनने वाला कोई नहीं। ऐसा लगता है मानो सरकार भी हमारी तरह अंधी हो गई है।”दृष्टिहीन जन संगठन ने स्पष्ट किया है कि इस बार आंदोलन केवल प्रतीकात्मक नहीं होगा।विश्व विकलांग दिवस के अवसर पर 3 दिसंबर को प्रदेशभर में चक्का जाम किया जाएगा। अगर इसके बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया, तो संगठन 4 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास ओक ओवर का घेराव करेगा और तब तक वहीं डटा रहेगा जब तक उनके मुद्दों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता।
दृष्टिहीन कोटे के खाली पड़े बैकलॉग पदों को एकमुश्त भरा जाए
संगठन की प्रमुख मांग है कि विभिन्न सरकारी विभागों में दृष्टिहीन कोटे के खाली पड़े बैकलॉग पदों को एकमुश्त भरा जाए। उनका कहना है कि इन पदों को भरने में लगातार देरी हो रही है, जिससे योग्य और शिक्षित दृष्टिबाधित युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। संगठन ने यह भी कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन दो साल से अधिक समय तक प्रतीक्षा करने के बाद अब उन्हें आंदोलन को तेज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, जबकि संगठन बार-बार यह मांग उठा रहा है कि दिव्यांगजनों से जुड़े मुद्दों पर जल्द और सकारात्मक निर्णय लिए जाएं। फिलहाल प्रदेश की नजर अब 3 और 4 दिसंबर को होने वाले संगठन के बड़े आंदोलन पर टिकी है।