रोहतक | पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरुवार को रोहतक के लाखनमाजरा स्टेडियम पहुंचे, जहाँ अभ्यास के दौरान गिरे पोल की चपेट में आए राष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी की मौत के बाद उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने हरियाणा की खेल नीति और खेल ढांचे की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए।
खेल नीति पर CM मान का सवाल : “अगर मैदान से लाशें आएंगी, तो कौन भेजेगा बच्चों को?”
सीएम मान ने कहा कि हार्दिक की मौत खेल सुविधाओं में लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने पूछा कि खेल मैदान में इतना कमजोर पोल क्यों लगाया गया था? मान ने कहा— “अगर खेल मैदान से खिलाड़ियों की लाशें आने लगेंगी तो माता-पिता अपने बच्चों को खेलने कैसे भेजेंगे?” उन्होंने देशभर के सभी खेल मैदानों की सुविधाओं और सुरक्षा का राष्ट्रीय स्तर पर ऑडिट कराने की मांग की, ताकि खिलाड़ी सुरक्षित वातावरण में कॉमनवेल्थ जैसे बड़े आयोजनों की तैयारी कर सकें।
हार्दिक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजे की मांग
सीएम भगवंत मान ने हरियाणा सरकार से आग्रह किया कि हादसे से पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और परिवार को सम्मानजनक आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी के बाद सरकार की जिम्मेदारी है कि वह परिवार को उचित सहयोग दे।
कैसे हुआ हादसा?
मंगलवार सुबह करीब 10 बजे राष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी अभ्यास कर रहा था। तभी स्टेडियम में लगा पुराना और जर्जर पोल अचानक टूटकर उसके सीने पर गिर पड़ा। 16 वर्षीय हार्दिक गंभीर रूप से घायल हुआ और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने खेल सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हार्दिक का चयन हाल ही में नेशनल अकादमी इंदौर के लिए हुआ था, और वह 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहा था।
पिता का दर्द : “मेरे बेटे ने देश के लिए खेलने का सपना देखा था”
मृतक खिलाड़ी के पिता संदीप राठी ने कहा कि प्रशासन की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली। उन्होंने बताया: “हार्दिक बचपन से बास्केटबॉल खेलता था। मैंने घर में उसके लिए रिंग लगाया था। वह 2026 में भारत के लिए खेलने की तैयारी कर रहा था। यह हादसा व्यवस्थाओं की लापरवाही का नतीजा है।”
संदीप राठी ने मांग की कि सरकार खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।