Shimla, Sanju-:हिमाचल प्रदेश में नवंबर माह इस बार अत्यधिक शुष्क साबित हुआ। पूरे प्रदेश में सामान्य से लगभग 95 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जिसके चलते कई जिलों में सूखे जैसी स्थिति बनी रही। प्रदेश में इन दिनों शीत लहर का भी प्रभाव लगातार बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, बीते 24 घंटों में पूरे हिमाचल में मौसम शुष्क रहा, जबकि राजधानी शिमला में दिनभर बादलों की आवाजाही जारी रही।
मौसम विभाग के वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि 1 दिसंबर को चंबा के ऊपरी इलाकों में हल्की बर्फबारी की संभावना है। 2 व 3 दिसंबर को पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहने का अनुमान है, हालांकि बिलासपुर, मंडी और हमीरपुर जिलों के कुछ क्षेत्रों में कोहरे को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। सुबह के समय इन जिलों में दृश्यता कम होने की आशंका जताई गई है।
मुख्य बदलाव 4 दिसंबर को देखने को मिलेगा। इस दिन पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसके प्रभाव से चंबा, कुल्लू, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और कांगड़ा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है। हालांकि मैदानी और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम मुख्यतः शुष्क ही रहने की संभावना है। विभाग का कहना है कि इस प्रणाली का प्रभाव केवल एक दिन रहेगा, जिसके बाद 6 दिसंबर से पूरे प्रदेश में मौसम फिर से पूरी तरह साफ हो जाएगा।तापमान की बात करें तो राज्य के कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है। लाहौल-स्पीति में न्यूनतम तापमान माइनस 5.2 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया, जो अभी भी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान है। इसके विपरीत, पांवटा साहिब में अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मैदानों में अपेक्षाकृत गर्म मौसम का संकेत है। शिमला में भी अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक 19 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार, आगामी तीन दिनों में प्रदेश के तापमान में किसी बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना नहीं है। 6 दिसंबर के बाद तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। वहीं बिलासपुर, मंडी और हमीरपुर जिलों में अगले कुछ दिनों तक सुबह के समय घना कोहरा छाने की संभावना जारी रहेगी, जिसे लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है।एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि हिमाचल प्रदेश में नवंबर माह में इस बार बारिश का स्तर 1901 के बाद नौवीं बार इतना कम दर्ज किया गया है। इस असामान्य कमी ने मौसम विशेषज्ञों और कृषि क्षेत्र दोनों के लिए चिंता बढ़ा दी है।