चंडीगढ़ | मंगलवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 32 पैसे टूटकर इतिहास के सबसे निचले स्तर 89.85 पर आ गया। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती, लगातार विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिकवाली और आयातकों की बढ़ी मांग ने रुपया दबाव में रखा।
फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि कॉर्पोरेट्स और आयातकों की ऊँची डॉलर मांग के साथ-साथ कच्चे तेल की महंगी कीमतों ने भी बाजार धारणा को कमजोर किया है।
इंटरबैंक बाजार में रुपया गिरा
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया सुबह 89.70 पर खुला और जल्दी ही 89.85 के ऐतिहासिक निचले स्तर तक फिसल गया। यह सोमवार के बंद 89.53 से 32 पैसे की गिरावट को दर्शाता है। सोमवार को ही इंट्राडे में रुपया 89.79 तक गिर चुका था।
विश्लेषकों की राय
अनिल कुमार भंसाली, ट्रेजरी हेड, फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP ने कहा: “RBI बाजार में डॉलर बेच रहा है, लेकिन जब रुपए में मजबूती आई तो उसने डॉलर खरीदे भी। इस वजह से कुल मिलाकर डॉलर की मांग बनी हुई है। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि (8.2% GDP) भी डॉलर की तीव्र मांग के सामने दब गई है। साथ ही भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता ने स्थिति और जटिल बना दी है।”
अन्य आंकड़े:
- डॉलर इंडेक्स: 99.41
- ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स: USD 63.15 प्रति बैरल (मामूली गिरावट के साथ)
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में रुपया और डॉलर की ट्रेडिंग वैश्विक संकेतों, तेल की कीमतों और RBI की दखल पर निर्भर करेगी।