Dharamshala, 2 December-:हिमाचल प्रदेश सरकार ने भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) की चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण संशोधन का प्रस्ताव रखा है। सोमवार को सदन में प्रस्तुत संशोधन विधेयक के अनुसार अब रेरा चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में राज्य के मुख्य सचिव नियुक्त होंगे। अभी तक यह जिम्मेदारी हिमाचल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास होती थी। इसके साथ ही प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल वर्तमान पाँच वर्ष से घटाकर चार वर्ष करने का प्रावधान भी किया गया है, जो अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक प्रभावी रहेगा।
विधेयक प्रस्तुत करते हुए नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि इन संशोधनों का उद्देश्य रेरा की प्रशासनिक दक्षता और शासन व्यवस्था को बेहतर बनाना है। सरकार का मानना है कि रेरा एक प्रशासनिक एवं विनियामक निकाय है, जिसके संचालन के लिए प्रशासन, आवास, विधि और संबंधित क्षेत्रों में अनुभव की आवश्यकता होती है। इस दृष्टि से मुख्य सचिव, जो राज्य के वरिष्ठतम प्रशासनिक अधिकारी होते हैं, इस दायित्व के लिए अधिक उपयुक्त माने गए हैं।प्रस्तावित संशोधन का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि इससे कार्यपालिका की नियुक्ति प्रक्रिया में न्यायपालिका की प्रत्यक्ष भागीदारी समाप्त होगी, जो शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के अनुरूप है। इससे संभावित हितों के टकराव की स्थितियों से भी बचा जा सकेगा।
चयन समिति में मुख्य सचिव के अलावा आवास विभाग के सचिव सदस्य-संचालक के रूप में तथा विधि सचिव तीसरे सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यदि मुख्य सचिव स्वयं रेरा के किसी पद के दावेदार हों या किसी अन्य कारणवश समिति की अध्यक्षता करने में असमर्थ हों, तो सरकार अतिरिक्त मुख्य सचिव या समान श्रेणी के किसी अन्य अनुभवी अधिकारी को समिति का अध्यक्ष नामित करेगी।सरकार का दावा है कि इन बदलावों से चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता-आधारित होगी।