चंडीगढ़। हरियाणा में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जुड़े एक संवेदनशील मामले में एसआईटी की जांच तेज हो गई है। एडीजीपी वाई. पूरण कुमार के गनमैन रहे हवलदार सुशील कुमार से बरामद मोबाइल फोन में आईजी कार्यालय से संबंधित गोपनीय दस्तावेज मिलने के बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। इसके साथ ही उस पर एक ईएसआई की एसीआर ठीक कराने के बदले 1.25 लाख रुपए की मांग करने का आरोप भी सामने आया है। ये सभी तथ्य एसआईटी द्वारा तैयार की जा रही चार्जशीट का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
दो मोबाइल से मिला संवेदनशील रिकॉर्ड
एसआईटी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी सुशील कुमार से बरामद दोनों मोबाइल फोनों की डिजिटल जांच में
आईजी कार्यालय से जुड़े अहम दस्तावेजों की प्रतियां मिलीं। इनमें—
- ईएसआई रोशन लाल (758/रोहतक)
- मुख्य सिपाही सुशील कुमार (1970/रोहतक)
- ईएचसी सुदीप कुमार (2306/रोहतक)
से संबन्धित रिकॉर्ड शामिल है।
आईजी कार्यालय के क्लर्क मोहित का बयान भी दर्ज किया गया है। मोहित ने एसआईटी को बताया कि ये रिकॉर्ड निश्चित रूप से आईजी कार्यालय का है, लेकिन उसकी प्रतियां उसने किसी को नहीं दीं।
1.25 लाख रुपये एसीआर सुधारने के लिए मांगे जाने का आरोप
एसआईटी ने जेपी कॉलोनी निवासी नवीन कुमार का बयान भी शामिल किया है। नवीन ने बताया कि पीजीआई के डॉ. रविंद्र के कहने पर उसने ईएसआई रोशन लाल की एसीआर ठीक कराने के लिए गनमैन सुशील से संपर्क किया। इस काम के बदले सुशील ने 1.25 लाख रुपये की मांग की थी। इस संबंध में ईएसआई रोशन लाल और डॉ. रविंद्र के भी बयान चार्जशीट में शामिल किए गए हैं।
बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन
जांच टीम ने आरोपी सुशील कुमार के बैंक खातों की विस्तृत जांच भी करवाई। खातों में कई संदिग्ध जमा दिखे हैं, जिनमें—
- 15 सितंबर 2025 को 1 लाख रुपये
- 8,000 / 3,000 / 10,000 / 40,000 / 20,000 / 5,000 रुपये जैसी कई अन्य राशियां
विभिन्न तिथियों पर जमा की गईं। टीम इन रकमों के स्रोत का पता लगाने में जुटी है।
चार्जशीट पर अभी मंथन जारी
बुधवार को भी एसआईटी ने अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं की। मामले में आरोपी सुशील कुमार की अगली पेशी 5 दिसंबर को निर्धारित है। आरोपी इस समय अंबाला जेल में बंद है और संभावना है कि उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई जाएगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि मामला संवेदनशील और उच्चस्तरीय अधिकारियों से जुड़ा होने के कारण चार्जशीट को अंतिम रूप देने से पहले सभी साक्ष्यों की बहुत सावधानी से जांच की जा रही है।