चंडीगढ़ | हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य में खेती योग्य भूमि लगातार कम हो रही है, ऐसे में किसानों को पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक और मांग आधारित कृषि मॉडल अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि किसानों को वर्टिकल फार्मिंग, नियंत्रित वातावरण में खेती और अन्य आधुनिक तकनीकें अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि उनकी आय में सीधा इजाफा हो सके।
मुख्यमंत्री चंडीगढ़ में आयोजित डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में नई फसलों की मांग तेजी से बढ़ रही है, इसलिए हरियाणा को प्रतिस्पर्धा के अनुरूप उन फसलों के उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि “फ्यूचर रेडीनेस” के तहत कृषि क्षेत्र को अगले दस वर्षों की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ठोस योजना बनानी होगी।
सैनी ने कहा कि कृषि विभाग और डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर को मिलकर ऐसी तकनीक विकसित करनी चाहिए, जिससे किसान फसल अवशेष को आसानी से खेत से हटा सकें और पराली जलाने की समस्या पूरी तरह खत्म हो सके। उन्होंने संबंधित उद्योगों से भी बातचीत कर फसलों की नमी का स्तर तय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए जरूरी प्रबंध करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने गन्नौर में बन रही अंतरराष्ट्रीय हॉर्टिकल्चर मार्केट का भी जिक्र किया और कहा कि आने वाले वर्षों में यहां भारी भीड़ और दबाव बढ़ेगा। इसे देखते हुए विभाग को 10 से 20 वर्षों की दीर्घकालिक योजना तैयार करनी चाहिए, ताकि कृषि ढांचा मजबूत और टिकाऊ बन सके।
उन्होंने सभी विभागों को भविष्य की योजनाओं में एआई आधारित समाधान और डिजिटल गवर्नेंस को शामिल करने के निर्देश भी दिए। बैठक में विभाग की आयुक्त अमनीत पी. कुमार ने भविष्य विभाग की प्रगति और प्रारंभिक कार्यों की जानकारी दी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, कृषि विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल, वित्त विभाग के सचिव मोहम्मद शाइन, मुख्यमंत्री के ओएसडी राज नेहरू और विभाग के निदेशक डॉ. आदित्य दहिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।