नई दिल्ली | रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं। शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति भवन में जोरदार स्वागत के बाद पुतिन ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। पुतिन का स्वागत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।
पुतिन और पीएम मोदी के बीच आज होने वाली बैठक को कई मायनों में अहम माना जा रहा है। दोनों नेताओं की बातचीत में तेल आपूर्ति बढ़ाने, न्यूक्लियर एनर्जी क्षेत्र में सहयोग के नए विकल्प खोजने, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और Su-57 फाइटर जेट जैसी डिफेंस डील्स पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा, अमेरिका के दबाव और रूस से भारत के तेल आयात पर प्रभाव को भी इस बैठक में शामिल किया जाएगा।
इस दौरे के दौरान भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन भी आयोजित होगा। इसमें दोनों नेता रक्षा सहयोग को मजबूत करने, व्यापार घाटे को नियंत्रित करने और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) पर सहयोग के नए अवसर तलाशने पर चर्चा करेंगे। समिट के बाद पुतिन RT के नए इंडिया चैनल का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उनके सम्मान में राजकीय भोज आयोजित करेंगी।
राष्ट्रपति पुतिन का यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका ने रूस से भारत के तेल आयात पर टैरिफ बढ़ाए हैं, जिससे नई दिल्ली-वॉशिंगटन संबंधों में तनाव बढ़ा है। इस दौरे में ऊर्जा सहयोग, द्विपक्षीय व्यापार और तकनीकी हस्तांतरण पर भी विचार किया जाएगा। रूस के साथ रक्षा और व्यापारिक साझेदारी की मजबूती इस यात्रा की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है।
पूर्व भारतीय राजनयिकों के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य न केवल भारत-रूस संबंधों को सुदृढ़ करना है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति में संतुलन बनाए रखना भी है। इसके अलावा, व्यापार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ावा देने की उम्मीद है। पुतिन की यात्रा से भारतीय व्यवसायियों और किसानों को भी लाभ होने की संभावना जताई जा रही है।
पुतिन का दिन भर का शेड्यूल भी बेहद व्यस्त है। सुबह राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत, राजघाट में श्रद्धांजलि, पीएम मोदी के साथ बैठक, हैदराबाद हाउस में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस और शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ बैठक शामिल है। रात को पुतिन अपनी भारत यात्रा समाप्त कर रूस के लिए रवाना होंगे।
इस दौरे को लेकर भारतीय और रूसी अधिकारी दोनों ही उत्साहित हैं, क्योंकि यह यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक साझेदारी और द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर है।