नई दिल्ली। इंडिगो एयरलाइंस की सेवाओं में आई बाधा शनिवार को भी खत्म नहीं हुई। लगातार पाँचवें दिन उड़ान संचालन प्रभावित रहा और देश भर में बड़ी संख्या में फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं। इसका असर दिल्ली, लखनऊ, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, हैदराबाद सहित प्रमुख एयरपोर्ट्स पर दिखाई दिया, जहां यात्रियों को लंबी कतारों और अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।
एयरलाइन ने पहले ही स्पष्ट किया था कि हालात सामान्य होने में दो से तीन दिन लगेंगे। शनिवार को तिरुवनंतपुरम और अहमदाबाद एयरपोर्ट पर कई उड़ानें कैंसिल की गईं, जिससे यात्रियों की यात्रा योजनाएँ गड़बड़ा गईं।
तिरुवनंतपुरम में 6 घरेलू उड़ानें रद्द
अधिकारियों ने बताया कि तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंडिगो की कुल 26 निर्धारित उड़ानों में से छह घरेलू उड़ानों को रद्द करना पड़ा। इससे आने-जाने वाले कई रूटों पर यात्रा प्रभावित रही। इंडिगो की शनिवार के लिए कुल 22 घरेलू और 4 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें निर्धारित थीं।
अहमदाबाद में रात के समय 19 उड़ानें निरस्त
अहमदाबाद एयरपोर्ट पर भी संचालन पर बड़ा असर दिखा। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच सात आने वाली और 12 जाने वाली उड़ानें निरस्त करनी पड़ीं। अधिकारियों का कहना है कि यह हालिया दिनों में एयरलाइन के सामने आ रही ऑपरेशनल चुनौतियों की गंभीरता को दर्शाता है।
दिल्ली, मुंबई, पुणे और हैदराबाद में भी भारी असर
- पुणे एयरपोर्ट: 14 आगमन और 28 प्रस्थान उड़ानें रद्द
- दिल्ली एयरपोर्ट: 54 डिपार्चर और 52 अराइवल—कुल 106 उड़ानें रद्द
- मुंबई एयरपोर्ट: कुल 106 उड़ानें निरस्त
- हैदराबाद एयरपोर्ट: 69 उड़ानें रद्द
कई अन्य शहरों—लखनऊ, गुवाहाटी, कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई और पुणे—की उड़ानों पर भी असर पड़ा है। लखनऊ एयरपोर्ट पर यात्रियों और एयरलाइन स्टाफ के बीच बहस की नौबत आ गई। रिफंड और वैकल्पिक उड़ानों के लिए काउंटरों पर लंबी कतारें लग गईं, लेकिन यात्रियों को तुरंत राहत नहीं मिल पाई। कुछ यात्री मजबूरी में सड़क मार्ग से रवाना हुए।
डीजीसीए ने शुरू की जांच
लगातार बढ़ती गड़बड़ियों को देखते हुए डीजीसीए ने सख्त रुख अपनाया है। नियामक ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय चार सदस्यीय कमेटी बनाने के आदेश दिए हैं, जो इंडिगो की ऑपरेशनल रुकावटों की वजहों का आकलन करेगी। डीजीसीए के अनुसार, इंडिगो FDTL CAR 2024 के तहत संशोधित ड्यूटी आवर्स, फ्लाइट ड्यूटी पीरियड, फ्लाइट टाइम लिमिटेशन और अनिवार्य रेस्ट पीरियड लागू करने की तैयारी ठीक तरीके से नहीं कर पाई, जिसके कारण यह संकट उत्पन्न हुआ।