चंडीगढ़ | हरियाणा के डीजीपी ओपी सिंह ने साइबर सुरक्षा पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में नागरिकों के लिए नया सुरक्षा फॉर्मूला पेश किया। इसे उन्होंने पीवीआर (Pause, Verify, Report) मॉडल नाम दिया, जो ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल स्कैम से बचने का आसान और प्रभावी तरीका है। डीजीपी ने कहा कि आज के साइबर अपराधी तकनीक से ज्यादा मानव भावनाओं को हैक करते हैं और ठग अक्सर डर, जल्दबाजी, भरोसा, जिज्ञासा, लालच और लापरवाही जैसे ट्रिगर्स का फायदा उठाकर लोगों को फंसाते हैं।
पीवीआर मॉडल तीन सरल चरणों में काम करता है। सबसे पहले रुकिए, स्कैमर आपकी घबराहट पर निर्भर करता है, बस दो सेकंड रुकें और उनका खेल खत्म हो जाएगा। दूसरे चरण में जांचिए, किसी नंबर, लिंक या मैसेज की सच्चाई जरूर जांचें क्योंकि कोई भी असली संस्था भागदौड़ में निजी जानकारी नहीं मांगती।
तीसरे चरण में सूचित कीजिए , यदि किसी संदेश या कॉल में शक हो तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें; पुलिस मिनटों में पैसे फ्रीज कर सकती है। डीजीपी ने बताया कि यह मॉडल तत्काल अपनाया जा सकता है और नागरिकों को डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
हरियाणा में चौबीसों घंटे 1930 साइबर हेल्पलाइन, जिला-स्तरीय साइबर पुलिस स्टेशन, विशेष फॉरेंसिक टीमें और एफआईआर के बिना रिफंड सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ये सभी उपाय नागरिकों को तुरंत सहायता देने के लिए तैयार हैं और पीवीआर मॉडल के साथ मिलकर ऑनलाइन ठगी के मामलों को काफी हद तक रोक सकते हैं।