चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में हरियाणा नगरपालिका विधेयक-2025 को मंजूरी दी गई। इसके लागू होने के बाद अब तक प्रभावी दो कानून, हरियाणा नगरपालिका अधिनियम 1973 और हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994—पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे। सरकार का दावा है कि पूरे राज्य में एक ही कानून लागू होने से शहरी निकायों की कार्यप्रणाली पारदर्शी और एकरूप होगी।
नए कानून का उद्देश्य शहरी निकायों की प्रशासनिक क्षमता बढ़ाना, वित्तीय स्वायत्तता मजबूत करना और सेवा वितरण प्रणाली को सरल बनाना है। यह विधेयक पिछले दो वर्षों में व्यापक स्तर पर की गई समीक्षा और केंद्र सरकार के मॉडल नगरपालिका कानून के आधार पर तैयार किया गया है। मंत्री विपुल गोयल ने इसे शहरी विकास के लिए “मील का पत्थर” बताया, जबकि मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे शहरों में सुशासन के नए मानक स्थापित होंगे।
वित्तीय सुधारों के तहत, निकाय अब सरकार द्वारा तय सीमा में अपने कर और शुल्क स्वयं निर्धारित कर सकेंगे। इससे उनकी आय बढ़ेगी और स्थानीय विकास कार्यों की गति तेज होगी। साथ ही, निकायों की क्रेडिट रेटिंग होने से उन्हें बाजार से ऋण प्राप्त करने का रास्ता भी साफ होगा, जिससे बड़े शहरी प्रोजेक्टों को नई गति मिलेगी।
कैबिनेट बैठक में ग्रामीण प्रशासन से जुड़े एक और अहम प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। राज्य के छह जिलों—महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, यमुनानगर, फरीदाबाद, सिरसा और झज्जर के 17 गांवों को एक तहसील या उप-तहसील से दूसरी में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है। यह बदलाव भौगोलिक दूरी, सुविधा और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। उपायुक्तों की रिपोर्ट और राज्य स्तरीय पुनर्गठन कमेटी की सिफारिशों के बाद इन बदलावों को अंतिम मंजूरी दी गई।
सरकार का कहना है कि नए पुनर्गठन से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को प्रमाण पत्र, रजिस्ट्रेशन और राजस्व से जुड़े कार्यों के लिए बेहतर और तेज सेवाएं मिलेंगी। तहसीलों तक पहुंच की दूरी घटेगी और प्रशासनिक कार्यवाही भी सुचारू होगी।
इन व्यापक सुधारों के साथ हरियाणा सरकार ने शहरी और ग्रामीण प्रशासन में दक्षता बढ़ाने का संदेश दिया है। नए कानून और तहसीली पुनर्गठन से प्रदेश में शासन व्यवस्था को अधिक सुगम और आधुनिक बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।