नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के छठे दिन वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दोनों सदनों में विशेष चर्चा आयोजित की गई। सोमवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विषय पर संबोधन देते हुए इसे देश की सांस्कृतिक आत्मा और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बताया। मंगलवार को राज्यसभा में चर्चा जारी रही, जहां कई सदस्यों ने वंदे मातरम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर अपने विचार रखे।
अमित शाह: वंदे मातरम स्वतंत्रता संघर्ष की ऊर्जा, भारत के पुनर्जागरण का प्रतीक
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का आधार है। उन्होंने बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने ऐसे दौर में इसकी रचना की थी, जब विदेशी शासन भारत की संस्कृति और पहचान को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। वंदे मातरम ने उस समय देश को एक साझा भावनात्मक सूत्र में पिरोया।
अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम सदियों के संघर्ष, तप और त्याग का प्रतीक है—कश्मीर से कन्याकुमारी तक इसकी ध्वनि ने लोगों के मन में स्वतंत्रता का भाव जगाया। उन्होंने अरविन्दो घोष का संदर्भ देते हुए कहा कि वंदे मातरम को “भारत के पुनर्जन्म का मंत्र” माना गया है और आने वाले समय में भी यह राष्ट्रनिर्माण का मार्गदर्शन करता रहेगा।
वंदे मातरम पर लगे प्रतिबंधों का भी हुआ उल्लेख
गृहमंत्री ने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय गीत पर कई तरह की पाबंदियाँ लगाई गईं, लेकिन इसके बावजूद यह लोगों की भावनाओं का स्वर बनकर कायम रहा। उन्होंने कहा कि बंकिम बाबू स्वयं मानते थे कि उनकी अन्य सभी रचनाएँ भले ही लुप्त हो जाएं, लेकिन वंदे मातरम का संदेश हमेशा जीवित रहेगा।
सदन में जारी है चर्चा, पे मिनट अपडेट्स साझा
राज्यसभा में नेताओं के संबोधन लगातार जारी हैं और वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने को राष्ट्र की सांस्कृतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। संसद टीवी सहित सभी संसदीय माध्यमों पर चर्चा का सीधा प्रसारण जारी है