चंडीगढ़। हरियाणा में सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रहने से राज्यभर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। झज्जर सिविल अस्पताल सहित कई जिला अस्पतालों में ओपीडी तो खुली है, लेकिन ऑपरेशंस और विशेष जांच सेवाएं बंद रहने से मरीजों को नई तारीखें दी जा रही हैं। स्थिति को गंभीर होता देख स्वास्थ्य महानिदेशक ने हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMSA) के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए तलब किया है। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया सहित एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य सहभागी होंगे।
डॉक्टरों के अनुसार उनकी प्रमुख मांगों में एसएमओ (सीनियर मेडिकल ऑफिसर) की सीधी भर्ती पर रोक और संशोधित एसीपी (ACP) स्कीम को तुरंत लागू करना शामिल है। वहीं सरकार ने हड़ताल को अनुचित बताते हुए ESMA लागू कर दिया है और ‘नो वर्क, नो पे’ नीति की घोषणा कर दी है। इसके बावजूद डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि समाधान नहीं हुआ तो हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रहेगी।
झज्जर सिविल अस्पताल में बुधवार को लगने वाला मेडिकल बोर्ड दोपहर में शुरू तो हुआ, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण सभी मरीजों को अगले बुधवार तक के लिए वापस भेज दिया गया। गांव निमाना के चंदपाल अपने डिसएबिलिटी कार्ड के नवीनीकरण के लिए पहुंचे थे, लेकिन आंखों के डॉक्टर उपलब्ध न होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। ओपीडी में भी मशीन उपलब्ध न होने का हवाला देकर जांच टाल दी गई।
इसी तरह ENT विभाग में डॉक्टर मौजूद होने के बावजूद मरीजों को आगे की जांच के लिए PGI रेफर कर दिया गया। गर्भवती महिलाओं की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ी हुई है। अल्ट्रासाउंड और अन्य जांच सेवाएं प्रभावित हैं। दो दिन से अस्पताल चक्कर काट रहीं गर्भवती महिला आरती ने बताया कि अल्ट्रासाउंड की पर्ची तक नहीं काटी जा रही है, जिससे उनका परीक्षण लगातार टल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी निर्देशों के बावजूद कई अस्पतालों में सेवाएं पूरी तरह बाधित हैं। सरकार और डॉक्टरों के बीच होने वाली बैठक से ही अब इस गतिरोध के समाधान की उम्मीद की जा रही है।